1st Bihar Published by: First Bihar Updated Tue, 10 Feb 2026 09:11:07 AM IST
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Bhojpur rail project : भोजपुर और रोहतास जिले के लोगों के लिए आरा–सासाराम रेलखंड का दोहरीकरण महज एक रेलवे परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला बड़ा विकास कॉरिडोर साबित हो सकता है। वर्षों से लंबित इस परियोजना को अब गति मिलती नजर आ रही है। रेलवे प्रशासन ने इस रेलखंड के दोहरीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण और सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया है। इस पहल से स्थानीय व्यापारियों, किसानों और छोटे बाजारों में नई उम्मीद जगी है और लोगों को क्षेत्रीय विकास की संभावना दिखाई देने लगी है।
अब तक आरा–सासाराम रेलखंड एकल लाइन होने के कारण ट्रेनों की आवाजाही सीमित रही है। एक ही लाइन पर यात्री ट्रेन और मालगाड़ियों का संचालन होने से ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता था, जिसके कारण अक्सर ट्रेनों के समय में देरी होती थी। इस समस्या का सीधा असर व्यापार और माल परिवहन पर पड़ता था। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि माल की समय पर आपूर्ति नहीं होने से परिवहन लागत बढ़ जाती थी और उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था। रेलखंड के दोहरीकरण के बाद माल ढुलाई की गति तेज होगी और समय पर सामान पहुंचने से व्यापार को नया बल मिलेगा।
इस परियोजना से नोखा, संझौली, बिक्रमगंज, पीरो, गढ़हनी और उदवंतनगर जैसे कस्बों को भी बड़ा फायदा होने की संभावना है। वर्तमान में ये कस्बे केवल यात्री ट्रेनों के ठहराव तक सीमित हैं, लेकिन दोहरीकरण के बाद इन्हें लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। मालगाड़ियों की आवाजाही बढ़ने से अनाज, खाद, सीमेंट और कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान होगी। इससे स्थानीय मंडियों तक माल जल्द पहुंचेगा और किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही छोटे व्यापारियों के लिए भी बाजार तक पहुंच आसान होगी।
इस रेल परियोजना का सबसे बड़ा औद्योगिक प्रभाव चौसा थर्मल पावर प्लांट पर पड़ने की उम्मीद है। वर्तमान में इस पावर प्लांट तक कोयला पहुंचाने में समय और लागत अधिक लगती है, क्योंकि रेल लाइन पर दबाव बना रहता है। दोहरीकरण के बाद झारखंड के धनबाद क्षेत्र से कोयले की आपूर्ति तेज और कम लागत में संभव हो सकेगी। इससे बिजली उत्पादन की लागत घटेगी और आसपास के क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। उद्योगों के विस्तार से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल सकते हैं।
रेल सुविधा बेहतर होने से ट्रकों पर निर्भरता भी कम होगी। इससे सड़कों पर जाम की समस्या कम होगी और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। परियोजना के निर्माण चरण में भी स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सर्वेक्षण, निर्माण कार्य, सामग्री ढुलाई और अन्य सप्लाई से जुड़े कई छोटे-बड़े काम शुरू होंगे, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
यात्रियों के लिए भी यह परियोजना कई मायनों में लाभकारी साबित होगी। अभी मुख्य रेल मार्गों पर ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण कई ट्रेनें देर से चलती हैं या उन्हें दूसरे मार्ग से डायवर्ट करना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद ट्रेन संचालन सुचारू होगा और नई ट्रेनों के परिचालन की संभावना भी बढ़ेगी। पटना, सासाराम और वाराणसी के बीच यात्रा समय कम होने की उम्मीद है, जिससे रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
रेलवे का लक्ष्य इस परियोजना को लगभग तीन वर्षों में पूरा करने का है। यदि निर्धारित समय में काम पूरा हो जाता है, तो यह रेलखंड सिर्फ एक परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भोजपुर और रोहतास के लिए नए आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। आने वाले समय में यह क्षेत्रीय व्यापार, उद्योग और रोजगार के लिए मजबूत आधार बन सकता है और छोटे कस्बों को मिनी कॉमर्शियल हब में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।