Bihar Mid Day Meal Scheme : बिहार शिक्षा विभाग का नया नियम, सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल-टीचर्स रसोइयों से एक्स्ट्रा काम नहीं करा सकेंगे

Bihar Mid Day Meal Scheme : बिहार सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना के रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त काम करवाने पर सख्त रोक लगाई है। शिक्षा निदेशालय ने कहा कि केवल भोजन बनाने, परोसने और बर्तनों की सफाई ही किए जाएं; नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 23 Jan 2026 12:53:18 PM IST

Bihar Mid Day Meal Scheme : बिहार शिक्षा विभाग का नया नियम, सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल-टीचर्स रसोइयों से एक्स्ट्रा काम नहीं करा सकेंगे

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Bihar Mid Day Meal Scheme : बिहार के सरकारी स्कूलों में चल रही मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme) में रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त कार्य करवाने और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार न करने के कई मामले लंबे समय से सामने आते रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के निदेशालय ने अब एक सख्त आदेश जारी किया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में कार्यरत रसोईया-सह-सहायक से मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े कार्यों के अलावा कोई अन्य काम लेना नियमों के विरुद्ध है और ऐसा करने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।


मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र (भा.प्र.से.) द्वारा संचिका संख्या म.भो. को-ES-57/2012 अंश-235 के तहत सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी निदेशालय द्वारा पत्रांक 501, दिनांक 19 मार्च 2018 के माध्यम से स्पष्ट आदेश दिया जा चुका है कि रसोईया-सह-सहायक से केवल भोजन बनाने, बच्चों को भोजन परोसने और बर्तनों की साफ-सफाई जैसे कार्य ही लिए जाएं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।


फिर भी बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना रसोईया संघ के माध्यम से यह शिकायत प्राप्त हुई कि कई विद्यालयों में रसोईया-सह-सहायक से विद्यालय परिसर की सफाई, कमरों में झाड़ू लगवाने और शौचालय की साफ-सफाई जैसे अतिरिक्त कार्य कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार भी नहीं किया जा रहा है, जो नियमों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के भी विरुद्ध है।


शिकायतों में यह भी कहा गया है कि रसोईया-सह-सहायक को केवल मध्याह्न भोजन योजना के तहत निर्धारित कार्यों के लिए नियुक्त किया गया है, लेकिन कई बार स्कूलों में उन्हें अन्य कार्यों में लगा दिया जाता है। इससे न केवल उनका समय और मेहनत बर्बाद होता है, बल्कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी यानी बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना भी प्रभावित हो सकता है।


निदेशालय ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर से प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापक को स्पष्ट रूप से आदेश दें कि रसोईया-सह-सहायक से मध्याह्न भोजन योजना से इतर कोई भी कार्य न कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में उनके साथ गरिमापूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार हो।


निदेशालय का मानना है कि रसोईया-सह-सहायक विद्यालय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनकी भूमिका बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित है। उनसे अन्य कार्य कराना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनकी कार्य-दक्षता और मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके अलावा, इससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि कई बार उन्हें भारी काम या असुविधाजनक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।


शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि यदि किसी विद्यालय में रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त कार्य कराया गया, तो संबंधित प्रधानाध्यापक या पदाधिकारी पर कार्रवाई तय मानी जाएगी। यानी अब रसोईया से अन्य काम कराना प्रशासनिक रूप से “महंगा” साबित हो सकता है।


वर्तमान समय में बिहार के कई जिलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में कई सुधार किए जा रहे हैं। इसके बावजूद रसोईया-सह-सहायक से अतिरिक्त काम लेने की शिकायतें योजना की साख और उद्देश्य पर सवाल उठाती हैं। शिक्षा विभाग ने भी यह मान्यता दी है कि रसोईया-सह-सहायक का सम्मान और उनकी गरिमा बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि वे सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े हुए हैं।


इस आदेश के बाद यह अपेक्षा की जा रही है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी और स्कूल प्रबंधन इस दिशा में सतर्कता बढ़ाएंगे और रसोईया-सह-सहायक से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


मध्याह्न भोजन योजना के तहत रसोईया-सह-सहायक की भूमिका बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में उनसे अन्य कार्य करवाना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और वितरण में भी बाधा डाल सकता है। बिहार सरकार की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि योजना के मूल उद्देश्य को सुरक्षित रखा जा सके और रसोईया-सह-सहायक को उनके अधिकार एवं सम्मान मिल सके।


इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि स्कूलों में रसोईया-सह-सहायक से अन्य काम कराने की घटनाओं में कमी आएगी और उन्हें उनके निर्धारित कार्यों के अलावा किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्य के लिए नहीं बाध्य किया जाएगा। साथ ही, स्कूलों में उनका सम्मान और गरिमा बनाए रखने का भी कड़ा पालन सुनिश्चित होगा।