Bihar Budget Session : 60 दिनों में मिलेगा मुखिया जी को आर्म्स लाइसेंस, सदन में उठा मामला तो गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश

बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों के आर्म्स लाइसेंस लंबे समय से लंबित थे। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सभी जिलाधिकारियों को 60 दिनों में कार्रवाई का निर्देश दिया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 09 Feb 2026 11:51:04 AM IST

Bihar Budget Session : 60 दिनों में मिलेगा मुखिया जी को आर्म्स लाइसेंस, सदन में उठा मामला तो गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश

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Bihar Budget Session : बिहार विधानसभा में आज एक महत्वपूर्ण सवाल के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों के आर्म्स लाइसेंस के लंबित मामलों को लेकर सरकार की स्थिति उजागर हुई। विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद, पूरे बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों को आर्म्स लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रतिनिधियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन जिलाधिकारी की तरफ से अब तक मंजूरी नहीं दी गई है।


विधायक ने कहा कि यह मामला दो से तीन सालों से लटका हुआ है। क्षेत्रीय दौरे के दौरान पंचायत प्रतिनिधि जब उनसे इस मामले के बारे में सवाल करते हैं, तो वे खुद भी अचंभित रह जाते हैं कि आखिर यह प्रक्रिया क्यों लंबित है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि जिन लोगों ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, उन्हें कब तक मंजूरी मिल जाएगी।


इस सवाल के जवाब में गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्होंने मामले को गंभीरता से देखा है और इसे शीघ्रता से निष्पादित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों में 60 दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए गृह विभाग को आदेश दिया गया है कि सभी जिलाधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से निर्देशित किया जाए और वह इस प्रक्रिया को पूरा करें।


गृह मंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को आर्म्स लाइसेंस देने की प्रक्रिया को लंबित रखना अनुचित है और इससे प्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशों के अनुसार यह मामला प्राथमिकता पर रखा जाएगा और अब इसे और लटकाया नहीं जाएगा।


बिहार विधानसभा में आज की चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए कदम उठा रही है। 60 दिन की समयसीमा तय होने के बाद उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा जल्द ही हो जाएगा।