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न डिग्री, न ऑफिस… सिर्फ 45 मिनट में ₹900 की कमाई! स्किल वाले मजदूरों ने बदला खेल, AI के दौर में उठी नई बहस

Unorganised Sector Labour: आज के बदलते दौर में डिग्री बनाम हुनर की बहस तेजी से उठ रही है। जहां कई युवा 9 से 5 की नौकरी में सीमित वेतन पर काम कर रहे हैं, वहीं कारपेंटर, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन जैसे स्किल-बेस्ड पेशेवर कम समय में अच्छी कमाई कर रहे हैं..

न डिग्री, न ऑफिस… सिर्फ 45 मिनट में ₹900 की कमाई! स्किल वाले मजदूरों ने बदला खेल, AI के दौर में उठी नई बहस
Tejpratap
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4 मिनट

Skilled Labour Income: आज के बदलते दौर में कमाई का गणित तेजी से बदल रहा है। जहां एक तरफ लाखों रुपये खर्च कर डिग्री लेने वाले युवा 9 से 5 की नौकरी में सीमित वेतन पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हुनरमंद कारीगर कम समय में अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने इस पूरे मुद्दे को लेकर नई बहस छेड़ दी है और लोगों की सोच को झकझोर कर रख दिया है।


45 मिनट का काम, जेब में ₹900

इस चर्चा की शुरुआत एक साधारण लेकिन चौंकाने वाले अनुभव से हुई। एक व्यक्ति ने बताया कि उसने अपने घर में कुछ शेल्फ लगवाने और दीवार पर पेंटिंग टांगने के लिए एक कारपेंटर को बुलाया। काम बहुत छोटा था और महज 45 मिनट में पूरा भी हो गया, लेकिन जब भुगतान की बारी आई तो उसे 900 रुपये देने पड़े।


यह सुनते ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे महंगा बताया, तो कई ने कहा कि यह उस कारीगर के हुनर और अनुभव की कीमत है।


डिग्री बनाम हुनर की जंग

एक समय था जब Software Industry में नौकरी करना सफलता की सबसे बड़ी पहचान माना जाता था। लाखों का पैकेज और आरामदायक ऑफिस लाइफ युवाओं का सपना हुआ करता था। लेकिन अब Artificial Intelligence के बढ़ते प्रभाव ने इस क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है।


कई कंपनियों में छंटनी, काम का दबाव और नौकरी जाने का डर बढ़ता जा रहा है। इसके उलट, स्किल-बेस्ड काम करने वाले लोग जैसे कारपेंटर, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन अपने काम के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं और उनका काम फिलहाल एआई के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित माना जा रहा है।


लाखों में कमाई के दावे

इस बहस के दौरान कई और उदाहरण सामने आए। एक यूजर ने दावा किया कि Mumbai में एक प्लंबर सालाना करीब 18 लाख रुपये कमा रहा है। उसने अपनी कमाई से न सिर्फ एक अच्छी कार खरीदी, बल्कि खुद का घर भी बनवाया और गांव में जमीन भी ली।


वहीं Bengaluru के लोगों ने बताया कि वहां इलेक्ट्रिशियन और कारपेंटर 1-2 घंटे के काम के लिए 1000 से 2000 रुपये तक आसानी से चार्ज करते हैं। कई बार तो इनकी मांग इतनी ज्यादा होती है कि इन्हें अपनी सुविधा के हिसाब से ही काम करना पड़ता है।


बदलती सोच और बढ़ती मांग

इस पूरे मामले ने समाज में एक नई सोच को जन्म दिया है। अब लोग यह मानने लगे हैं कि सिर्फ डिग्री ही सफलता का रास्ता नहीं है, बल्कि सही स्किल और ट्रेनिंग के जरिए भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है।


कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्किल-बेस्ड वोकेशनल ट्रेनिंग युवाओं के लिए एक मजबूत करियर विकल्प बन सकती है। अगर युवाओं को सही दिशा में प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे कम समय में आत्मनिर्भर बन सकते हैं और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।


AI के दौर में सुरक्षित है हुनर?

आज जब Artificial Intelligence तेजी से हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है, तब यह सवाल उठना लाजिमी है कि कौन से काम सुरक्षित हैं। इस बहस के बाद यह बात काफी हद तक सामने आई है कि जो काम पूरी तरह मशीनों पर निर्भर नहीं हैं और जिनमें मानव कौशल की जरूरत है, वे अभी भी सुरक्षित हैं।


यही वजह है कि अब लोग ब्लू-कॉलर जॉब्स को भी सम्मान की नजर से देखने लगे हैं और यह समझने लगे हैं कि मेहनत और हुनर की कोई तुलना नहीं होती।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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