hair transplant death: कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत, डॉक्टर अनुष्का तिवारी ने कोर्ट में सरेंडर किया

hair transplant death: कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत के आरोप में डॉक्टर अनुष्का तिवारी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। डॉक्टर पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 26, 2025, 5:51:46 PM

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कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट विवाद - फ़ोटो Google

hair transplant death: हेयर ट्रांसप्लांट के 24 घंटे के भीतर दो इंजीनियरों की दर्दनाक मौत के मामले में आरोपी डॉक्टर अनुष्का तिवारी ने आखिरकार सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। वकीलों के जत्थे के साथ सीजेएम सूरज मिश्रा की अदालत में पेश होकर उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और डॉक्टर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।


बता दे कि डॉ. अनुष्का तिवारी के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें दोनों ही पीड़ित पेशे से इंजीनियर थे। दोनों की मौत हेयर ट्रांसप्लांट के 24 घंटे के भीतर हुई थी, जिससे डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा था और मामला मीडिया में आने से देश भर में  इस मुद्दें को लेकर बवाल हुई थी। पीड़ित  पनकी की ऑफिसर्स कॉलोनी में रहने वाले पावर प्लांट के सहायक अभियंता विनीत दुबे ने 13 मार्च को होली के दिन डॉक्टर अनुष्का तिवारी की क्लीनिक में हेयर ट्रांसप्लांट कराया। प्रक्रिया के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें शारदानगर के एक निजी अस्पताल और फिर रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 15 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके  बाद उनकी पत्नी जया दुबे ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया।


वहीँ फर्रुखाबाद निवासी और कानपुर के प्राणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक कर चुके इंजीनियर मयंक कटियार (32) ने 18 नवंबर को केशवपुर स्थित इंपायर क्लीनिक में हेयर ट्रांसप्लांट करवाया था। ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही उन्हें तेज दर्द और सूजन शुरू हो गई। डॉक्टर की सलाह पर इंजेक्शन लगवाया गया, लेकिन तबीयत बिगड़ती गई और अगले दिन मयंक की दर्द से तड़पते हुए मौत हो गई। उनकी मां पिछले छह महीने से डॉक्टर के खिलाफ न्याय के लिए भटक रही थीं, लेकिन पोस्टमॉर्टम न होने के चलते एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी थी।


डॉ. अनुष्का की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दिल्ली से पानीपत तक चार टीमें  लगातार छापेमारी  कर रही थी, लेकिन वह फरार चल रही थीं। आखिरकार बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने कोर्ट का रुख किया। लेकिन कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। यह मामला न केवल मेडिकल लापरवाही का गंभीर उदाहरण है, बल्कि कॉस्मेटिक सर्जरी क्लीनिकों की मनमानी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।