बिहार में भी हो गया ऑपरेशन लोटस? सीएम नीतीश कुमार के सबसे बड़े फैसले पर उठ रहे सवाल, निशाने पर बीजेपी

Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सीएम पद छोड़ने और राज्यसभा जाने के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और जेडीयू कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि क्या बिहार में भी ऑपरेशन लोटस लागू किया जा रहा है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 05, 2026, 12:56:52 PM

Nitish Kumar

बिहार में ऑपरेशन लोटस! - फ़ोटो Google

Nitish Kumar: बिहार की सियासत में एक युग का अंत होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीएम की कुर्सी छोड़ने और राज्यसभा जाने का ऐलान कर दिया है हालांकि अचानक नीतीश कुमार के इस बड़े फैसले को लेकर बिहार की सियासत में कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या बिहार में भी ऑपरेशन लोटस हो गया है?


दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीयू से लेकर बीजेपी और एनडीए ने “25 से 30, फिर से नीतीश” का नारा दिया था। पटना से लेकर जिला मुख्यालयों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ पोस्टर लगाए गए थे, जिसपर यह स्लोगन लिखा गया था कि 2025 से 2030 तक नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।


हालांकि बिहार का सियासी ऊंट कब किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा कोई भी नहीं लगा सकता है। विधानसभा में भारी महुमत के साथ चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार लगातार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनें लेकिन किसे पता था कि सिर्फ चार महीने में ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। लेकिन यही सच है, नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं है। इसके लिए पहले से ही माहौल तैयार किया गया, जब परिस्थितियां जेडीयू के पक्ष में नहीं थीं तो नीतीश को साथ रखा गया। अब, जब हालात नियंत्रण में दिख रहे हैं, तो पहले से बनाई गई योजना को लागू किया जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति महीनों पहले तय की गई थी और सही समय का इंतजार किया जा रहा था।


यह भी माना जा रहा है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की योजना को होली के दिन लागू करने का फैसला किया गया, ताकि जिस नेता के नेतृत्व में एनडीए चुनाव जीतती, उसकी लोकप्रियता पर असर न पड़े। फिलहाल, जेडीयू और बीजेपी के बीच सीएम के चयन पर सहमति बनी हुई है। जेडीयू की शर्त है कि अगला मुख्यमंत्री वही होगा जिस पर दोनों पार्टियां सहमत हों और जिस पर नीतीश कुमार की मुहर लगी हो।


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में जेडीयू की भावभंगिमा और रणनीति बदल सकती है, और यह कदम लंबे समय से सोची-समझी योजना का हिस्सा है। उधर, विपक्ष के साथ साथ जेडीयू के कार्यकर्ता इसको लेकर गंभीर आरोप लगा रह हैं और कह रहे हैं कि एक सोची समझी साजिश के तहत नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया जा रहा है। जेडीयू कार्यकर्ता खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन उनका मानना है कि इन सबके पीछे सहयोगी दल और पार्टी के कुछ नेताओं का हाथ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार में भी ऑपरेशन लोटस हो गया है।