1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Feb 14, 2026, 1:22:20 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना, व्रत, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव ने शिवलिंग रूप में अपना दिव्य प्रकाश प्रकट किया था। इसे शिव-पार्वती के विवाह दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। श्रद्धा से पूजा और मंत्र जाप करने से मन, विचार और कर्म शुद्ध होते हैं तथा जीवन की परेशानियों में राहत मिलती है।
महाशिवरात्रि 2026: तिथि और समय
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे
निशीथ काल (सबसे शुभ मुहूर्त)
16 फरवरी, रात 12:09 AM से 01:01 AM
यह समय रुद्राभिषेक और विशेष शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
चार प्रहर की पूजा समय-सारिणी
पहला प्रहर: शाम 06:11 बजे से 09:23 बजे तक
दूसरा प्रहर: 09:23 बजे से 12:35 बजे तक
तीसरा प्रहर: 12:35 बजे से 03:47 बजे तक
चौथा प्रहर: 03:47 बजे से 06:59 बजे तक
महाशिवरात्रि पूजा-विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 या 1008 बार जाप करें। अंत में दीप प्रज्ज्वलित कर शिव चालीसा और भजन-कीर्तन करें।
रुद्राभिषेक का महत्व
महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर मंत्रोच्चार के साथ जल, दूध, दही आदि से अभिषेक करने से मन की शांति, भय और तनाव में कमी तथा सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।
फलाहार या निर्जल व्रत रख सकते हैं। दूध, फल और सादा भोजन ग्रहण करें। संयम, सत्य और मन की शांति बनाए रखें। पंचामृत से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” और रुद्र मंत्रों का जाप करें। रात भर भजन-कीर्तन या शिव कथा सुनें और दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करें। पूजा में अशुद्ध वस्तुओं का प्रयोग न करें। व्रत के दौरान मांस, नशा और भारी भोजन से दूर रहें। महाशिवरात्रि आध्यात्मिक जागरण और आत्मशुद्धि का पर्व है, जो भक्तों को भक्ति, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।