दूध की रखवाली बिल्ली को..! इसी तरह से शराबबंदी सफल बनाने में जुटी है नीतीश सरकार, शराब सिंडिकेट में शामिल 'उत्पाद अधीक्षक' पर गजब मेहरबान है एक्साइज डिपार्टमेंट, जानें....

बिहार में शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल गहराए हैं। बक्सर में शराब सिंडिकेट से जुड़े आरोपों में घिरे तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक को निलंबन के बाद फिर से जहानाबाद में फील्ड पोस्टिंग दे दी गई।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Fri, 20 Feb 2026 02:53:28 PM IST

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Bihar News: बिहार में शराबबंदी कानून फेल है. अफसर और माफिया माल बना रहे और सरकार को लाखों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा. लिहाजा शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए. बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में शराबबंदी कानून की समीक्षा या वापस लेने की मांग उठ रही है.सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्य बार-बार इस बात को कह रहे कि शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू की जाए. शराबबंदी को विफल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. लेकिन यहां कार्रवाई होती कहां है..यहां तो खेल में शामिल अधिकारियों को फिर से पोस्टिंग मिल जाती है. जिन अधिकारियों पर उत्तरप्रदेश से बिहार में दारू घुसवाकर मोटी कमाई करने के आरोप हैं, एसपी की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ, इसके बाद भी मद्य निषेध विभाग पर कोई फर्क नहीं पड़ा. कार्रवाई के नाम पर कुछ दिनों का निलंबन ,इसके बाद फिर से फील्ड पोस्टिंग. यह खेल मद्य निषेध विभाग में लगातार जारी है.विभाग के अंदर चल रहे खेल की दूसरी किस्त पढ़िए....  

मद्य निषेध विभाग में जारी है खेल....

मद्य निषेध विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त वैसे अधिकारी(उत्पाद अधीक्षक) को सम्मानित करते रहा है. वर्ष 2024 में बक्सर एसपी की रिपोर्ट में बक्सर जिले के उत्पाद अधीक्षक बेनकाब हुए। शराब माफियाओं से मिलीभगत साबित होने के बाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. हद तो तब हो गई जब मद्य निषेध विभाग ने फिर से उक्त अधिकारी को फील्ड में उत्पाद अधीक्षक बना कर पोस्टिंग दे रखा है. एक तरफ विभाग विभागीय कार्यवाही भी चला रहा, दूसरी तरफ आरोपी अधिकारी को फील्ड में उसी पद पर पोस्टिंग देकर उपकृत कर रहा.  बात बक्सर जिले के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक की हो रही है.  

दिलीप पाठक पर दारू के सिंडिकेट में शामिल होने के आरोप साबित  

बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक के खिलाफ शराब माफियाओं से मिलकर उप्र से बिहार में शराब सप्लाई की बात प्रमाणित हुई थी. जांच में यह बात सामने आई  थी कि उत्पाद अधीक्षक की भूमिका संदिग्ध है. इसके बाद बक्सर जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र में 21 जून 2024 को दर्ज कांड सं- 132/2024 में ये अप्राथमिक अभियुक्त बनाए गए. बक्सर पुलिस अधीक्षक की सुपरविजन रिपोर्ट में भी दिलीप कुमार पाठक के खिलाफ आरोप सही साबित हुए। इसके बाद से वे फरार हो गए थे. मामले में इन्होंने हाईकोर्ट से जमानत ली. मामला गंभीर होने के बाद मद्य निषेध विभाग ने शराब के सिंडिकेट में शामिल बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक को निलंबित कर दिया था.  कुछ दिनों तक निलंबित रखने के बाद फिर से नौकरी में वापसी कराकर फील्ड पोस्टिंग दे दी गई. दिलीप कुमार पाठक वर्तमान में जहानाबाद जिले के उत्पाद अधीक्षक के तौर पर पदस्थापित हैं. यानि फिर से फील्ड पोस्टिंग...।

शराब के खेल में शामिल अधीक्षक शराबबंदी कानून को सफल बना रहे 

इधर विभाग ने 26 अगस्त 2025 के प्रभाव से इन आरोपों को लेकर विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश जारी किया. पटना के मद्य निषेध उपायुक्त रेणु कुमारी सिन्हा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया. विभागीय कार्यवाही की खानापूर्ति जारी है, और आरोपी उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक को जहानाबाद में उसी पद (अधीक्षक) पर पदस्थापित कर शराबबंदी कानून को पूर्ण रूप से लागू करा रहा है.