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BIHAR NEWS : अनंत सिंह को जमानत कैसे मिली? पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटा पूरा केस! गवाहों के बयान में अंतर; हर तारीख पर पेश होंगे बाहुबली

मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और FIR में विरोधाभास से केस में नया मोड़।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 24, 2026, 7:35:53 AM

BIHAR NEWS : अनंत सिंह को जमानत कैसे मिली? पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटा पूरा केस!  गवाहों के बयान में अंतर;  हर तारीख पर पेश होंगे बाहुबली

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BIHAR NEWS  : मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह जेल से रिहा हो गए हैं। रिहाई के बाद वह बड़े लावलश्कर और समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपने पटना स्थित विधायक आवास पहुंचे। यहां से उनके आज मोकामा जाने का कार्यक्रम है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें 15-15 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत दी गई है। हालांकि यह जमानत कई शर्तों के साथ दी गई है और मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।


यह मामला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है, जिसने राजनीतिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। अब जब पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को राहत मिली है, तो इस केस की जांच प्रक्रिया, पुलिस की थ्योरी और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।


अदालत में क्या हुए अहम तर्क

पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अनंत सिंह की ओर से पेश किए गए तर्कों ने केस की दिशा को प्रभावित किया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि अनंत सिंह पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। वकील ने अदालत को बताया कि अब तक कोई भी incriminating सामग्री उनके कब्जे से बरामद नहीं हुई है।


साथ ही यह भी कहा गया कि पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में ऐसे ठोस साक्ष्य नहीं हैं, जो सीधे तौर पर उनकी संलिप्तता साबित करते हों। बचाव पक्ष ने FIR का हवाला देते हुए कहा कि आरोप के अनुसार अनंत सिंह ने मृतक के पैर की एड़ी पर गोली चलाई थी, लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि गोली जानलेवा इरादे से चलाई गई थी। गोली शरीर के किसी महत्वपूर्ण हिस्से पर नहीं लगी और न ही बार-बार फायरिंग की गई।


याचिकाकर्ता के पक्ष ने यह भी दलील दी कि पूरे मामले में घटनाक्रम और साक्ष्यों के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, जिससे यह प्रतीत होता है कि जांच के दौरान तथ्यों को ठीक से नहीं परखा गया। वकील ने अदालत से आग्रह किया कि इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की जाए।


पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली तस्वीर

मामले का सबसे अहम पहलू पोस्टमार्टम रिपोर्ट रही। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट में मौत का कारण गोली नहीं बताया गया है। इसके अनुसार, मृतक की मौत “hard and blunt substance” से लगी गंभीर चोटों के कारण हुई। यानी किसी कठोर और भारी वस्तु से लगी चोट के कारण हुई, जिससे शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं।  रिपोर्ट में कहा गया कि फेफड़ों और हृदय के कुचल जाने से hypovolemic shock हुआ, जो मौत की वजह बना।


बचाव पक्ष का कहना है कि इस तरह की गंभीर चोटें सह-आरोपियों द्वारा की गई बताई गई हैं, न कि अनंत सिंह द्वारा। इस आधार पर उन्होंने तर्क दिया कि FIR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ता है।


गवाहों के बयान और केस डायरी

केस डायरी के एक महत्वपूर्ण पैराग्राफ 212 का हवाला देते हुए बचाव पक्ष ने बताया कि सूचक के पिता ने अपने बयान में घटना के समय किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने केवल यह बताया कि उनके बेटे ने फोन पर सूचना दी कि उनके पिता की मृत्यु हो गई है। वकील ने बताया कि सूचक (informant) के पिता ने अपने बयान में कहा है कि जब वह अपने कार्यालय में थे, तब उनके बेटे ने मोबाइल पर उन्हें सूचना दी कि उनके पिता की मृत्यु हो गई है। इस सूचना में न तो याचिकाकर्ता का नाम लिया गया और न ही किसी अन्य व्यक्ति का जिक्र किया गया।


इसके अलावा, गवाहों के बयान में भी कई विरोधाभास सामने आए। कई गवाहों ने घटना के दौरान मारपीट और फायरिंग की बात कही, लेकिन किसी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि गोली किसने चलाई। इससे अभियोजन की कहानी पर संदेह और गहरा गया।


FIR में क्या है पूरी कहानी

FIR के अनुसार, 30 अक्टूबर 2025 को पटना के बसावनचक इलाके में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान तनाव की स्थिति पैदा हुई। पुलिस डायरी के मुताबिक, फ्लैग मार्च के दौरान सूचना मिली कि अनंत सिंह के काफिले और दूसरे पक्ष के समर्थकों के बीच टकराव हो गया है।


घटनास्थल पर पहुंचने पर पुलिस ने देखा कि कई गाड़ियों के शीशे टूटे हुए थे और अफरा-तफरी का माहौल था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले बहस हुई और फिर मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान फायरिंग की आवाज सुनाई दी, जिससे भगदड़ मच गई।


गवाहों ने बताया कि दुलारचंद यादव को गोली लगी और वह गिर पड़े। इसके बाद आरोप है कि अनंत सिंह के काफिले की गाड़ियां उनके ऊपर से गुजर गईं, जिससे उनकी हालत और गंभीर हो गई। बाद में अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।


FIR में यह भी उल्लेख है कि घटनास्थल से FSL टीम ने साक्ष्य जुटाए, जिनमें टूटे कांच, मिट्टी के नमूने और अन्य भौतिक सबूत शामिल हैं। हालांकि, पूरे घटनाक्रम में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि मौत का वास्तविक कारण गोली थी या वाहन से कुचलना।


जांच पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और FIR के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, तो जांच कितनी निष्पक्ष और सटीक रही। बचाव पक्ष का आरोप है कि जांच के दौरान तथ्यों का सही तरीके से विश्लेषण नहीं किया गया।


वहीं, पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि घटनास्थल पर मौजूद गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आरोपियों की भूमिका स्पष्ट है और उन्हें राहत नहीं दी जानी चाहिए थी।

आगे क्या

फिलहाल अनंत सिंह को जमानत मिल गई है, लेकिन मामला अभी अदालत में लंबित है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दुलारचंद यादव की मौत के लिए कौन जिम्मेदार था। इस केस ने न केवल बिहार की राजनीति में हलचल मचाई है, बल्कि पुलिस जांच प्रणाली की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।