1st Bihar Published by: First Bihar Updated Tue, 23 Dec 2025 03:29:18 PM IST
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DPO Bihar : जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के लिए आवास भत्ता से संबंधित प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह कदम विशेष रूप से उन शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में उठाया गया है, जिन्हें नगर परिषद और नगर पंचायत मुख्यालय से आठ किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित विद्यालयों में तैनात होने के कारण बढ़ा हुआ आवास भत्ता मिलता है।
जिले में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने सूचना दी थी कि कई प्रधानाध्यापक सीधे उनके कार्यालय में आवास भत्ता स्वीकृति के लिए आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। इस पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया खेदजनक है और शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से कहा कि आवास भत्ता के लिए आवेदन सीधे कार्यपालक अभियंता को न भेजें, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही करें।
जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे नगर परिषद और नगर पंचायत मुख्यालय से आठ किलोमीटर की परिधि में स्थित सभी विद्यालयों की सूची तैयार करें। इस सूची में सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी विद्यालय शामिल होंगे। सूची तैयार होने के बाद संबंधित सक्षम प्राधिकरण, जैसे पथ निर्माण विभाग या ग्रामीण कार्य विभाग, के साथ समन्वय स्थापित कर दूरी प्रमाण पत्र निर्गत कराना सुनिश्चित किया जाएगा।
दूरी प्रमाण पत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल उन्हीं विद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी बढ़ा हुआ आवास भत्ता प्राप्त करें, जो मुख्यालय से निर्धारित दूरी पर स्थित हैं। इस प्रक्रिया से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त होगी।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से यह भी निर्देश दिया है कि निर्गत दूरी प्रमाण पत्रों के साथ तैयार की गई विद्यालयों की सूची एक सप्ताह के भीतर उनके कार्यालय में जमा कराई जाए। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि योग्य शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर बढ़ा हुआ आवास भत्ता प्रदान किया जा सके।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने विशेष रूप से यह कहा कि आदेश का पालन न करने वाले किसी भी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में सभी स्तरों पर समन्वय आवश्यक है, ताकि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे।
इस प्रक्रिया के माध्यम से यह भी संदेश दिया गया है कि शिक्षा विभाग में नियमों का पालन और प्रशासनिक कार्यों का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। आवास भत्ता जैसी संवेदनशील वित्तीय प्रक्रिया में नियमों का पालन करना न केवल कर्मचारियों के हित में है बल्कि सरकारी संसाधनों के उचित उपयोग को भी सुनिश्चित करता है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों की सटीक जानकारी एकत्र करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी विद्यालय सूची में छूट न जाए। इसके लिए वे स्थानीय अधिकारियों, प्रधानाचार्यों और संबंधित विभागों के साथ नियमित समन्वय कर सकते हैं। प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद ही शिक्षकों और कर्मचारियों का आवास भत्ता स्वीकृत किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इस प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग प्रदान करना होगा। आदेश का पालन करके ही शिक्षकों और कर्मचारियों को उनके वित्तीय अधिकारों के अनुरूप भत्ता प्रदान किया जा सकेगा।
इस आदेश के बाद जिले में आवास भत्ता वितरण प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध हो जाएगी। इससे न केवल शिक्षकों और कर्मचारियों के वित्तीय हितों की रक्षा होगी बल्कि शिक्षा विभाग में प्रशासनिक कार्यों में भी अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
अंततः यह कहा जा सकता है कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के आदेश से शिक्षा विभाग में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रधानाध्यापक और संबंधित विभाग इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहयोग करके यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी योग्य शिक्षकों और कर्मचारियों को उनका सही भत्ता समय पर प्राप्त हो।
इस कदम के माध्यम से जिले में शिक्षा विभाग में पारदर्शिता, अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल की गई है। यह आदेश शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में होने के साथ-साथ विभागीय प्रशासनिक कार्यों को भी मजबूत बनाएगा।