1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 08 Feb 2026 09:17:47 AM IST
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Bihar cyber crime : बिहार में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और बेहतर अनुसंधान के लिए राज्य पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। इस योजना के तहत अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को मिलाकर एक संयुक्त और मजबूत टीम बनाई जाएगी, ताकि साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई की जा सके और अपराधियों की गतिविधियों की प्रभावी निगरानी हो सके।
इस प्रस्ताव में बिहार पुलिस की साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा इकाई के साथ-साथ दूरसंचार विभाग, मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों और बैंकों के नोडल पदाधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय वित्त मंत्रालय की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) को भी इस टीम में शामिल करने की योजना है, जिससे आर्थिक लेन-देन से जुड़े साइबर अपराधों पर बेहतर नजर रखी जा सके।
बिहार पुलिस स्तर पर इस प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और जल्द ही एक औपचारिक ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके बाद संयुक्त टीम नियमित बैठकें करेगी और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में साझा रणनीति के तहत कार्रवाई करेगी।
दरअसल, राज्य में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी बैंक कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों से पैसे ऐंठने के मामले आम हो गए हैं। हाल ही में फर्जी सिम बॉक्स का मामला भी सामने आया है, जिसका दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। इस तरह के मामलों में अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण जांच और कार्रवाई में देरी हो जाती है।
नई संयुक्त टीम के गठन से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। दूरसंचार विभाग और मोबाइल कंपनियों की भागीदारी से फर्जी सिम, कॉल रूटिंग और संदिग्ध नंबरों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। वहीं, बैंकों के नोडल अधिकारी संदिग्ध लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े मामलों में तेजी से जानकारी साझा कर सकेंगे। वित्तीय खुफिया इकाई की मौजूदगी से अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराधों की जांच भी मजबूत होगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध आज केवल तकनीकी चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ विषय बन चुका है। ऐसे में अलग-अलग विभागों की संयुक्त टीम बनाकर काम करना समय की जरूरत है। इससे न सिर्फ अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सकेगा, बल्कि उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखना भी आसान होगा।
इस पहल से आम लोगों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। शिकायत दर्ज कराने से लेकर जांच और कार्रवाई तक की प्रक्रिया तेज होगी। पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा और साइबर अपराधियों के मनोबल पर भी असर पड़ेगा। बिहार पुलिस का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
कुल मिलाकर, साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को देखते हुए बिहार सरकार और पुलिस की यह संयुक्त पहल एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य में डिजिटल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।