1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 25 Jan 2026 11:39:52 AM IST
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Bihar Electricity News : बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अक्सर देखा जाता है कि बिजली गुल होने पर लोग शिकायत नंबर ढूंढते रहते हैं, कभी कॉल सेंटर का नंबर नहीं मिलता तो कभी स्थानीय कार्यालय और लाइनमैन के बीच तालमेल की कमी से समस्या लंबी खिंच जाती है। इसी परेशानी को खत्म करने के लिए बिहार बिजली विभाग ने एक नया और व्यावहारिक सिस्टम लागू करने का फैसला किया है, जिससे एक कॉल पर ही शिकायत सीधे जिम्मेदार फील्ड कर्मचारियों तक पहुंचेगी और उपभोक्ता खुद अपनी शिकायत की पूरी प्रगति देख सकेंगे।
24 जनवरी 2026 को ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) और उसकी सभी सहयोगी कंपनियों की एक अहम समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में बिजली व्यवस्था को ज्यादा जवाबदेह, पारदर्शी और आम लोगों के अनुकूल बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए।
हर बिजली बिल पर छपेगा कॉल सेंटर का मोबाइल नंबर
बैठक का सबसे अहम फैसला यह रहा कि अब हर बिजली बिल पर संबंधित इलाके के कॉल सेंटर का मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से छापा जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि बिजली गुल होने, ट्रिपिंग या किसी तकनीकी फॉल्ट की स्थिति में उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। वे सीधे उसी कॉल सेंटर से संपर्क कर सकेंगे, जो फील्ड में काम करने वाली टीम से जुड़ा होगा।
अब तक अक्सर ऐसा होता था कि उपभोक्ता यह तय ही नहीं कर पाते थे कि शिकायत कहां दर्ज करें—केंद्रीय कॉल सेंटर, स्थानीय कार्यालय या सीधे लाइनमैन से। इस भ्रम की वजह से शिकायत दर्ज होने में देरी होती थी और समाधान भी समय पर नहीं हो पाता था। नए सिस्टम में बिजली बिल ही शिकायत दर्ज कराने का सबसे आसान और भरोसेमंद माध्यम बन जाएगा।
ऑनलाइन पोर्टल से होगी शिकायतों की रियल टाइम निगरानी
बिजली विभाग ने पहली बार मुख्यालय स्तर पर एक एकीकृत ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करने का भी फैसला लिया है। इस पोर्टल पर राज्य के सभी बिजली अंचलों की शिकायतें दर्ज होंगी। जैसे ही कोई उपभोक्ता शिकायत दर्ज करेगा, उसे एक यूनिक शिकायत आईडी दी जाएगी।
इस आईडी के जरिए उपभोक्ता मोबाइल या कंप्यूटर पर यह देख सकेगा कि उसकी शिकायत किस स्तर पर है, किस अधिकारी या कर्मचारी के पास लंबित है और उसके समाधान की संभावित समय-सीमा क्या है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी। शिकायतों को अनदेखा करना अब आसान नहीं रहेगा।
स्मार्ट मीटर डेटा से मजबूत होगी आपूर्ति व्यवस्था
बैठक में स्मार्ट मीटर से मिलने वाले डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। विभाग स्मार्ट मीटर के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह समझेगा कि किन इलाकों में बार-बार फॉल्ट हो रहे हैं, कहां ओवरलोड की समस्या है और किन जगहों पर मेंटेनेंस की ज्यादा जरूरत है। तकनीक की मदद से अब बिजली व्यवस्था को ज्यादा वैज्ञानिक, सटीक और भरोसेमंद बनाने की तैयारी है।
31 मार्च तक ग्रिड और डीटीआर दुरुस्त करने का निर्देश
गर्मी के मौसम में बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है। इसे देखते हुए ऊर्जा सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च 2026 तक सभी ग्रिड, पावर सब-स्टेशन, डीटीआर (डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर), फीडर और अन्य विद्युत संरचनाओं का मेंटेनेंस हर हाल में पूरा किया जाए। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन करने को कहा गया है, ताकि गर्मियों में बिजली कटौती और तकनीकी फॉल्ट से उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी हो।
उपभोक्ता भरोसे पर फोकस
इन सभी फैसलों का मकसद सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि आम लोगों का भरोसा जीतना है। जब शिकायत दर्ज करने से लेकर समाधान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य होगी, तो बिजली कंपनियों पर सकारात्मक दबाव बनेगा। इससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी समस्या को गंभीरता से सुना और हल किया जा रहा है।
बिजली बिल पर कॉल सेंटर नंबर, एकीकृत ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और 31 मार्च तक ग्रिड व डीटीआर दुरुस्त करने का लक्ष्य—ये तीनों कदम मिलकर बिहार की बिजली व्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। अब देखना यह है कि आने वाले महीनों में इसका असर जमीन पर कितनी मजबूती से दिखता है।