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Bihar News : बिहार पुलिस में अनफिट रवैया खत्म, जवानों के लिए रोज़ाना दौड़ और कड़ी कार्रवाई अनिवार्य; जारी हुआ आदेश

बिहार पुलिस में स्मार्ट पुलिसिंग की शुरुआत। अब सभी जिलों में जवानों और अधिकारियों के लिए रोज सुबह फिटनेस ड्रिल और सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ अनिवार्य।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 25, 2026, 12:57:19 PM

Bihar News : बिहार पुलिस में अनफिट रवैया खत्म, जवानों के लिए रोज़ाना दौड़ और कड़ी कार्रवाई अनिवार्य; जारी हुआ आदेश

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Bihar News : बिहार पुलिस की छवि को लेकर वर्षों से एक रूढ़ तस्वीर लोगों के मन में बनी रही—ढीली-ढाली वर्दी, थुलथुल काया और औपचारिक ड्यूटी। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदलने जा रही है। राज्य स्तर पर पुलिस मुख्यालय ने स्मार्ट पुलिसिंग को धरातल पर उतारने के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब लक्ष्य सिर्फ अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि फिट, फुर्तीली और पेशेवर पुलिस फोर्स तैयार करना है।


नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी पुलिस केंद्रों में जवानों और अधिकारियों की रोजाना सुबह अनिवार्य उपस्थिति दर्ज होगी। प्रत्येक दिन कम से कम एक घंटे का शारीरिक प्रशिक्षण, दौड़ और व्यायाम किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि पूरी पुलिस फोर्स को चुस्त-दुरुस्त, सक्रिय और मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना है। अब पुलिसकर्मी बैरक या सरकारी आवास में आराम फरमाने के बजाय मैदान में पसीना बहाते नजर आएंगे।


इस पहल के अंतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों के पुलिस केंद्रों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सिंथेटिक ट्रैक तैयार किए जाएंगे। पालीयूरेथेन या लैटेक्स आधारित इन ट्रैकों पर दौड़ना पारंपरिक कच्चे या सीमेंटेड मैदान की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। इन ट्रैकों पर नियमित दौड़ लगाने से न केवल वजन नियंत्रित रहेगा, बल्कि मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी और सहनशक्ति में भी वृद्धि होगी।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित दौड़ और व्यायाम से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है, उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आता है। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी अक्सर तनावपूर्ण और अनियमित समय-सारिणी वाली होती है। ऐसे में शारीरिक फिटनेस उनके मानसिक संतुलन और निर्णय क्षमता को भी मजबूत बनाती है। सिंथेटिक ट्रैक का एक अतिरिक्त लाभ यह भी है कि दौड़ते समय गिरने पर चोट की आशंका कम रहती है, जिससे प्रशिक्षण सुरक्षित रहता है।


इस नई व्यवस्था की मॉनिटरिंग उच्च स्तर पर की जाएगी। एसएसपी, एसपी, डीएसपी और अन्य वरीय अधिकारी स्वयं सुबह के अभ्यास सत्र में मौजूद रहेंगे और जवानों की उपस्थिति तथा प्रदर्शन की निगरानी करेंगे। यह केवल औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि इसे सेवा अनुशासन का हिस्सा बनाया गया है। यदि कोई पुलिसकर्मी बिना उचित कारण सुबह के अभ्यास से अनुपस्थित रहता है या लापरवाही दिखाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


राज्य भर में हजारों की संख्या में तैनात हवलदार, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक, निरीक्षक और अन्य पदाधिकारी इस फिटनेस अभियान का हिस्सा होंगे। वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से जवानों का मनोबल भी बढ़ेगा और एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा। जब नेतृत्व स्वयं मैदान में उतरेगा, तो अधीनस्थों में भी अनुशासन और प्रेरणा स्वतः विकसित होगी।


स्मार्ट पुलिसिंग केवल आधुनिक हथियारों, तकनीक या डिजिटल मॉनिटरिंग तक सीमित नहीं है। इसका मूल आधार है—फिट और सतर्क मानव संसाधन। एक चुस्त-दुरुस्त पुलिसकर्मी ही आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है, भीड़ नियंत्रण में दक्षता दिखा सकता है और अपराधियों का प्रभावी ढंग से पीछा कर सकता है। शारीरिक स्फूर्ति सीधे तौर पर कार्यकुशलता और जनविश्वास से जुड़ी होती है।


इस पहल से पुलिस बल की सार्वजनिक छवि में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। जब नागरिक अपने क्षेत्र में फिट, अनुशासित और ऊर्जावान पुलिसकर्मियों को देखेंगे, तो विश्वास और सम्मान स्वतः बढ़ेगा। यह बदलाव केवल शरीर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कार्य संस्कृति और पेशेवर दृष्टिकोण में भी सुधार लाएगा।


राज्य स्तर पर शुरू की गई यह फिटनेस पहल पुलिसिंग के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयोग मानी जा रही है। यदि इसे सख्ती और निरंतरता के साथ लागू किया गया, तो आने वाले समय में बिहार पुलिस की पहचान एक आधुनिक, सक्षम और स्मार्ट फोर्स के रूप में स्थापित हो सकती है।