1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 16, 2026, 7:17:15 AM
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Bihar politics : बिहार की राजनीति आज बेहद सक्रिय है, क्योंकि राज्य की पांच राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विधानसभा परिसर में सुबह नौ बजे से मतदान शुरू होगा और शाम चार बजे तक चलेगा। मतदान कक्ष में हर पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, ताकि विधायकों के वोटिंग के बाद उनका मतदान वैध माना जा सके। मतदान की पूरी प्रक्रिया विधानसभा के अधिकारियों द्वारा व्यवस्थित रूप से पूरी कर ली गई है।
इस बार मतदान में विधायकों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी अन्य पेन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। केवल मतदान कक्ष में उपलब्ध बैगनी स्कैच पेन का उपयोग करना अनिवार्य होगा। मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं है।
मतदान में विधायकों को अपनी पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे 1, 2 और 3 अंक लगाने होंगे। ‘1’ का अर्थ है पहली वरीयता का वोट, ‘2’ दूसरी वरीयता और ‘3’ तीसरी वरीयता का वोट। यदि किसी सीट पर पहली वरीयता के आधार पर जीत का फैसला नहीं हो पाता है, तो केवल उस सीट के लिए दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाएगी। जीत के लिए पहली वरीयता के 41 वोट आवश्यक हैं।
राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए विधायकों की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एनडीए विधायकों की बैठक में हिस्सा लिया और लगभग 15 मिनट वहां रुके। इस दौरान उन्होंने सभी दलों के विधायकों से मुलाकात कर वरिष्ठ नेताओं से चुनाव की रणनीति की जानकारी ली। इसके अलावा, जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी के आवास पर एनडीए विधायकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी प्रमुख नेताओं ने अपनी राय रखी और उम्मीदवारों को समर्थन देने की रणनीति तय की। बैठक के बाद मंत्री लेशी सिंह ने बताया कि सभी विधायकों को मतदान प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी पुनः दे दी गई है।
मतदान के बाद शाम पांच बजे से मतपत्रों की गिनती शुरू होगी और लगभग एक घंटे में परिणाम आने की संभावना है। पहली वरीयता के वोटों के आधार पर जीत तय होगी। यदि किसी सीट पर निर्णय नहीं हो पाया, तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में विधायकों के मतदान का परिणाम बिहार की आगामी सियासी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। विपक्षी दलों की निगाहें भी इन परिणामों पर टिकी हुई हैं। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और कड़ाई से पालन किए गए नियमों के चलते किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना बहुत कम मानी जा रही है।
बिहार की सियासी हलचल के बीच यह चुनाव महज एक संसदीय प्रक्रिया नहीं बल्कि शक्ति, रणनीति और राजनीतिक गणित की परीक्षा बन चुका है। ऐसे में विधायकों का हर वोट मायने रखता है और परिणाम आने के बाद अगले राजनीतिक कदम तय होंगे।राज्यसभा चुनाव 2026 के इस मतदान से बिहार की राजनीतिक तस्वीर अगले कुछ महीनों के लिए आकार लेगी और सभी दल अपनी तैयारियों के साथ आगे की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।