Bihar Ration Card eKYC : बिहार में राशन कार्डधारियों को इस डेट तक हर हाल में करना होगा यह काम, डेढ़ करोड़ लाभुकों का कट सकता है नाम

बिहार में राशन कार्डधारियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है। अब तक डेढ़ करोड़ लाभुकों का सत्यापन बाकी है। सरकार ने अंतिम तिथि 31 मार्च तय की है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 07, 2026, 7:36:40 AM

Bihar Ration Card eKYC : बिहार में राशन कार्डधारियों को इस डेट तक हर हाल में करना होगा यह काम, डेढ़ करोड़ लाभुकों का कट सकता है नाम

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Bihar Ration Card eKYC : बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन लेने वाले सभी लाभुकों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बावजूद राज्य में बड़ी संख्या में राशन कार्डधारियों का ई-केवाईसी अब तक नहीं हो सका है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार करीब डेढ़ करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी अभी भी लंबित है। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है और सभी जिलों को अभियान चलाकर इसे पूरा करने का निर्देश दिया गया है।


विभागीय आंकड़ों के मुताबिक बिहार में कुल लगभग आठ करोड़ 20 लाख राशन लाभुक हैं। इनमें से करीब 18 प्रतिशत यानी लगभग डेढ़ करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी अब तक नहीं हो पाया है। सरकार का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर ई-केवाईसी नहीं कराया गया तो ऐसे लाभुकों को भविष्य में खाद्यान्न योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है।


खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए जिलों के सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है। पहले इसके लिए 15 फरवरी तक का समय दिया गया था, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण इसे बढ़ाकर 28 फरवरी कर दिया गया। इसके बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं होने पर अब अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई है।


विभाग के अनुसार कई जिलों में ई-केवाईसी की प्रगति काफी धीमी है। वैशाली, सीवान, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, पश्चिम चंपारण और अररिया जैसे जिलों में बड़ी संख्या में लाभुकों का सत्यापन लंबित है। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता की कमी, जानकारी का अभाव और बड़ी संख्या में लोगों का राज्य से बाहर रहना इसके प्रमुख कारण हैं।


राज्य सरकार ने अनुमंडल पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वे संदिग्ध राशन कार्डधारियों की जांच प्रक्रिया को तेज करें। जानकारी के अनुसार बिहार में 57 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों को संदिग्ध सूची में शामिल किया गया है। इन लाभुकों की पात्रता की जांच की जा रही है और कई मामलों में नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।


अधिकारियों के मुताबिक जिन लाभुकों को नोटिस भेजा गया है, उनसे निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा जा रहा है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनके नाम को राशन कार्ड से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अब तक करीब 33 लाख से अधिक लोगों के नाम ऐसी सूची में डाले जा चुके हैं, जिनके कार्ड रद्द किए जाने की संभावना है।


सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी कराने की प्रक्रिया काफी सरल है और इसे देश के किसी भी राज्य में कराया जा सकता है। ऐसे राशन कार्डधारी जो रोजगार या अन्य कारणों से बिहार से बाहर रह रहे हैं, उन्हें केवल अपने निकटतम जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान पर जाकर ई-केवाईसी कराना होगा। इसके लिए उन्हें बिहार लौटने की आवश्यकता नहीं है।


विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कई लाभुक ऐसे भी हैं जो लंबे समय से राशन नहीं उठा रहे हैं, जिसके कारण उनका सत्यापन लंबित है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र लोगों को ही खाद्यान्न योजना का लाभ मिले और फर्जी या अपात्र लाभुकों को सूची से हटाया जा सके।


खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे जागरूकता अभियान चलाकर लाभुकों को ई-केवाईसी कराने के लिए प्रेरित करें। साथ ही जनवितरण प्रणाली के डीलरों को भी निर्देश दिया गया है कि वे लाभुकों को इसकी जानकारी दें और ई-केवाईसी की प्रक्रिया को तेज करें, ताकि 31 मार्च से पहले सभी पात्र लाभुकों का सत्यापन पूरा किया जा सके।