1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 05 Feb 2026 07:58:30 AM IST
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Bihar Bhumi : बिहार सरकार ने राज्यभर में सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरकारी जमीन पर वर्षों से कब्जा होने का दावा अब मान्य नहीं होगा। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों (समाहर्ताओं) को आदेश दिया है कि यदि किसी सरकारी भूमि पर 30 वर्ष या उससे अधिक समय से भी किसी व्यक्ति या संस्था का कब्जा है, तो उसे अतिक्रमण ही माना जाएगा और विधि के अनुसार नोटिस जारी कर जमीन को खाली कराया जाएगा।
विभाग की ओर से 3 फरवरी को जारी पत्र में जमीन से जुड़े अभिलेखों और सर्वे खतियान को लेकर लंबे समय से चल रहे भ्रम को भी दूर करने की कोशिश की गई है। प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया है कि बिहार में भूमि का सबसे पहला और मूल अभिलेख कैडस्ट्रल सर्वे (1890-1920) को माना जाएगा। यदि इस सर्वे में किसी जमीन को सरकारी, सैरात या गैरमजरूआ के रूप में दर्ज किया गया है, तो वर्तमान समय में भी उस जमीन को सरकारी ही माना जाएगा।
विभाग के अनुसार, कई मामलों में देखा गया है कि बाद में हुए रिविजनल सर्वे या अन्य सर्वेक्षण के दौरान कुछ सरकारी जमीनें गलती से निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज हो गई हैं। ऐसे मामलों में भी जमीन का सरकारी स्वरूप स्वतः समाप्त नहीं माना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन को निजी तभी माना जाएगा जब संबंधित व्यक्ति के पास समाहर्ता के आदेश से हुई विधिवत बंदोबस्ती का पुख्ता प्रमाण मौजूद हो और वह प्रमाण सरकारी अभिलेखों में दर्ज हो।
राजस्व विभाग ने यह भी साफ किया है कि केवल लंबे समय से कब्जा होने के आधार पर किसी भी व्यक्ति को जमीन का स्वामित्व अधिकार नहीं दिया जा सकता। भूमि स्वामित्व का दावा करने के लिए वैध कागजात और कानूनी प्रमाण अनिवार्य होंगे। सरकार का कहना है कि सरकारी जमीन का रैवतीकरण यानी निजीकरण एक जटिल और कानूनी प्रक्रिया है, जिसे निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही पूरा किया जा सकता है।
यह निर्देश दरभंगा के जिलाधिकारी द्वारा उठाए गए एक तकनीकी प्रश्न के बाद जारी किया गया है। जिलाधिकारी ने विभाग से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया था कि लंबे समय से कब्जे वाली जमीनों और सर्वे रिकॉर्ड में अंतर होने की स्थिति में किसे आधार माना जाए। इसके बाद विभाग ने पूरे राज्य के लिए एक समान दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि भूमि विवादों और प्रशासनिक असमंजस को समाप्त किया जा सके।
सरकार का मानना है कि राज्य की जमीनें सार्वजनिक संपत्ति हैं और इनकी सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के कारण कई विकास योजनाएं और सार्वजनिक परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। इसलिए प्रशासन अब ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करने की तैयारी में है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में सरकारी जमीनों की पहचान कर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेज करें।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस फैसले से राज्य में जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही यह कदम सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शी भूमि प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा न करें और यदि किसी के पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज हैं, तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें।