Bihar school News : शिक्षक अब बच्चों को पढ़ाने से पहले करेंगे ‘पाठ टीका’ तैयार, जानिए क्या है पूरा नियम; मिड डे मील में भी बढ़ेगी सतर्कता

बिहार के स्कूलों में शिक्षक अब किसी भी विषय को पढ़ाने से पहले ‘पाठ टीका’ तैयार करेंगे। मिड डे मील की निगरानी भी बढ़ाई गई है, ताकि बच्चों का पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 28 Jan 2026 09:21:08 AM IST

Bihar school News : शिक्षक अब बच्चों को पढ़ाने से पहले करेंगे ‘पाठ टीका’ तैयार, जानिए क्या है पूरा नियम; मिड डे मील में भी बढ़ेगी सतर्कता

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Bihar school News : बिहार में शिक्षकों के लिए नया दिशा -निर्देश जारी किया गया है। इसके तहत जिला शिक्षक कार्यालय ने शिक्षकों के लिए एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत अब शिक्षक किसी भी विषय को कक्षा में पढ़ाने से पहले उसे खुद पढ़ेंगे और उसका होमवर्क करके आएंगे। इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए इसे “पाठ टीका” नाम दिया गया है।


निर्देश के अनुसार, शिक्षक को पढ़ाने से पहले और पढ़ाए गए विषय को डायरी में नोट करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि शिक्षक विषय को बिना तैयारी के कक्षा में न पढ़ाएं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में देखा गया है कि शिक्षक विषय को पूरी तरह से समझे बिना बच्चों के सामने पढ़ाई शुरू कर देते हैं। इससे बच्चों द्वारा पूछे गए सवालों का सही और त्वरित जवाब देना शिक्षक के लिए मुश्किल हो जाता है।


जिला शिक्षक कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक शिक्षक को एक दिन पहले यह तय करना होगा कि वह अगले दिन कक्षा में कौन सा पाठ पढ़ाएंगे। इसके बाद ही शिक्षक उस पाठ का “पाठ टीका” तैयार करेंगे। यह पाठ टीका एक तरह की डायरी होगी, जिसमें शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाने वाला विषय, महत्वपूर्ण बिंदु, उदाहरण और बच्चों से पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न लिखे होंगे।


इस व्यवस्था से न केवल शिक्षक का पढ़ाने का स्तर सुधरेगा, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता भी बढ़ेगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को गहरी समझ और सवाल पूछने की आदत विकसित करने में मदद करेगा।


जिला शिक्षक कार्यालय ने यह भी निर्देश दिया है कि पाठ टीका में विषय के साथ-साथ शिक्षक को यह नोट करना होगा कि किस-किस बच्चों ने विषय को समझा और किसे अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। यह शिक्षक और बच्चों दोनों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगा।


इसी के साथ, मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को मिल रहे भोजन की गुणवत्ता पर भी विभाग की कड़ी नजर रहेगी। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया है कि भोजन देने से पहले स्वयं यह जांच करें कि भोजन सुरक्षित और साफ-सुथरा है। अगर प्रधान शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित शिक्षक यह जिम्मेदारी निभाएंगे।


भोजन वितरण स्थल की सफाई और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सेहत और पोषण सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके तहत यह भी देखा जाएगा कि बच्चों को मिल रहे भोजन से उन्हें किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।


जिला कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को नियमित रूप से इस प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। यदि किसी शिक्षक ने पाठ टीका तैयार किए बिना कक्षा में पढ़ाई की तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी है।


शिक्षक संघ ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा कि इससे न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि बच्चों के प्रश्नों का समाधान भी बेहतर होगा। शिक्षक इस व्यवस्था को शिक्षा में उत्तरदायित्व और तैयारी की आदत के रूप में देख रहे हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ टीका और मिड डे मील की निगरानी दोनों ही कदम बच्चों के शैक्षणिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी हैं। इससे न केवल शिक्षकों में जिम्मेदारी बढ़ेगी, बल्कि बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह भी बढ़ेगा। जिला शिक्षक कार्यालय ने सभी प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से आग्रह किया है कि वे इसे केवल एक अनिवार्य निर्देश न समझें, बल्कि इसे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को प्रभावी और सुरक्षित बनाने का जरिया मानें। इस प्रकार, पाठ टीका और मिड डे मील की निगरानी जैसी नई पहलें बिहार के विद्यालयों में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।