1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 20 Feb 2026 12:49:43 PM IST
- फ़ोटो
Bihar Education Minister : बिहार विधान परिषद में आज विश्वविद्यालयों में आउटसोर्सिंग के जरिए बहाल कर्मियों के मुद्दे पर जोरदार चर्चा हुई। प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि साल 2018 में स्थापित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय और पूर्णिया विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कर्मियों को न तो नौकरी की सुरक्षा है और न ही उचित वेतन मिल रहा है।
प्रो. यादव ने सदन में कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियों को प्रति कर्मचारी लगभग 30 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है, लेकिन संबंधित कर्मियों को मात्र 13 से 15 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे “श्रमिकों के साथ अन्याय” करार देते हुए मांग की कि राज्य सरकार इन कर्मचारियों को 60 वर्ष तक रोजगार की गारंटी दे और वेतन भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करे। उनका कहना था कि शिक्षा संस्थानों में इस प्रकार की व्यवस्था से असंतोष और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
इस मुद्दे पर सभापति ने भी चिंता जताई और कहा कि यदि भुगतान और सेवा शर्तों में इस तरह की विसंगतियां हैं तो यह निश्चित रूप से गंभीर मामला है। उन्होंने सरकार को निर्देश दिया कि सभी संबंधित विश्वविद्यालयों में इसकी व्यापक जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
चर्चा के दौरान डॉ. कुमुद वर्मा ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यही स्थिति ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में भी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के नाम पर कर्मचारियों का शोषण हो रहा है और सरकार को इस पर ठोस नीति बनानी चाहिए। उनका सुझाव था कि विश्वविद्यालय प्रशासन और एजेंसियों के बीच हुए अनुबंध को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां निजी संस्थाएं होती हैं और सरकार उन्हें 60 साल तक नौकरी की गारंटी देने का निर्देश सीधे तौर पर नहीं दे सकती। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि ऑडिट प्रक्रिया के तहत सभी विश्वविद्यालयों में भुगतान और अनुबंध की शर्तों की जांच कराई जाएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सदन में इस मुद्दे पर हुई चर्चा से स्पष्ट है कि विश्वविद्यालयों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर व्यापक असंतोष है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रस्तावित जांच के बाद सरकार क्या कदम उठाती है और कर्मचारियों को राहत देने के लिए कौन-सी ठोस पहल की जाती है।