1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 20 Feb 2026 11:52:41 AM IST
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Bihar Health Department : बिहार विधानसभा में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जब भाजपा के विधायक ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विधायक नीतीश मिश्रा ने विशेष रूप से झंझारपुर अनुमंडल अस्पताल की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से जवाब मांगा।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक नीतीश मिश्रा ने कहा कि जिस अस्पताल को लेकर उन्होंने प्रश्न उठाया है, उसी परिसर में भारत सरकार और बिहार सरकार के सहयोग से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में निर्माण पूर्ण होने के बाद अनुमंडल अस्पताल की स्थिति क्या होगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए ? उनका तर्क था कि जब मेडिकल कॉलेज उसी कैंपस में संचालित होगा तो वर्तमान अस्पताल की प्रशासनिक और चिकित्सीय व्यवस्था में क्या बदलाव होगा, इस पर विभाग को स्पष्ट नीति बतानी चाहिए?
इस पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने जवाब देते हुए कहा कि यह सवाल मूल प्रश्न में अंकित नहीं था। यदि इसे प्रश्न में शामिल किया गया होता तो विभागीय समीक्षा कराकर विस्तृत उत्तर दिया जाता। मंत्री ने संकेत दिया कि विभाग इस विषय पर जानकारी जुटाकर उचित समय पर जवाब दे सकता है।
इसके बाद भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा ने पूरक प्रश्न के माध्यम से झंझारपुर अनुमंडल अस्पताल की वास्तविक स्थिति सदन के सामने रखी। उन्होंने कहा कि झंझारपुर अनुमंडल अस्पताल तीन विधानसभा क्षेत्रों—झंझारपुर, फुलपरास और राजनगर—के लोगों के इलाज का प्रमुख केंद्र है। बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं, लेकिन विभागीय जवाब और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
नीतीश मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनके पिछले प्रश्न में झंझारपुर अस्पताल की स्थिति पूछी गई थी, लेकिन विभाग ने उत्तर फुलपरास विधानसभा से संबंधित दे दिया। इसे उन्होंने गंभीर लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा कि विभागीय जवाब में लिखा गया है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है, जबकि वहां नियमित रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। इस कारण आम मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता और केवल कुछ विशेष मामलों में ही जांच की जाती है।
इसी तरह दवाइयों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। विधायक ने कहा कि दवाइयां तो उपलब्ध बताई गई हैं, लेकिन उन्हें वितरित करने के लिए फार्मासिस्ट सप्ताह में केवल तीन दिन ही आते हैं। इससे मरीजों को दवा लेने में कठिनाई होती है और कई बार उन्हें निजी दुकानों से दवा खरीदनी पड़ती है।
विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी या सचिव उनके साथ अस्पताल का दौरा कर वास्तविक स्थिति की समीक्षा करें, ताकि कागजी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का अंतर सामने आ सके।
मंत्री मंगल पांडे ने इस पर आश्वासन दिया कि वह निदेशक प्रमुख को निर्देश जारी करेंगे कि संबंधित सदस्य के साथ जाकर अस्पताल की समीक्षा की जाए। मंत्री के इस जवाब के बाद सदन में कुछ हद तक स्थिति शांत हुई, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।