1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 25, 2026, 11:01:53 AM
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बिहार में चार दिवसीय चैती छठ पर्व का बुधवार को उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के साथ समापन हो गया। सुबह होते ही राज्य के विभिन्न जिलों के घाटों, नदियों और तालाबों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए और विधि-विधान के साथ उगते सूर्य की पूजा की। छठ व्रतियों ने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की मंगलकामना और समाज की खुशहाली के लिए अर्घ्य दिया। इस दौरान पूरे प्रदेश में भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
हालांकि इस पावन अवसर पर कुछ जगहों से दुखद घटनाएं भी सामने आईं, जिसने पर्व की खुशियों को फीका कर दिया। राजधानी पटना के मालसलामी थाना क्षेत्र स्थित दमराही घाट पर बड़ा हादसा हो गया। गंगा स्नान के दौरान तीन युवक गहरे पानी में डूब गए। स्थानीय गोताखोरों और प्रशासन की मदद से दो युवकों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि तीसरे युवक की तलाश जारी है। मृतकों की पहचान कंकड़बाग थाना क्षेत्र के रोहित कुमार और गणेश कुमार के रूप में हुई है, जबकि शिबू नामक युवक अब भी लापता है। बताया जा रहा है कि ये युवक जोगीपुर इलाके से अपने दोस्त के घर छठ पर्व में शामिल होने आए थे।
इसी तरह भोजपुर जिले के आरा में भी एक दर्दनाक हादसा हुआ। बबुरा थाना क्षेत्र के बिशुनपुर भागड़ नदी में छठ पूजा के दौरान दो बच्चों के डूबने की सूचना है। दोनों की मौत से इलाके में मातम पसरा हुआ है। मृतकों में एक नागेंद्र पाठक का पुत्र था, जो बनारस में पढ़ाई करता था और छठ के मौके पर घर आया था। दूसरा युवक नरेंद्र प्रसाद का पुत्र था, जिसने हाल ही में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी।
पटना जिले के मनेर क्षेत्र में भी गंगा नदी में एक युवक के डूबने की खबर सामने आई है। ब्रह्मचारी घाट के पास हुए इस हादसे के बाद से युवक की तलाश जारी है। इसके अलावा दनियावां प्रखंड के सूर्य मंदिर तालाब में भी एक व्यक्ति के डूबने की सूचना है, जहां स्थानीय प्रशासन और गोताखोरों की टीम खोजबीन में जुटी हुई है।
वहीं नवादा जिले में एक अलग तरह का हादसा सामने आया। छठ घाट से लौट रहे एक युवक की बाइक की टक्कर से मौत हो गई। यह घटना रूपौ थाना क्षेत्र के कनौलिया गांव के पास हुई, जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
इन हादसों के बावजूद पूरे बिहार में चैती छठ का पर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। चार दिनों तक कठिन व्रत और नियमों का पालन करने वाले श्रद्धालुओं ने पूरी निष्ठा के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना की। घाटों पर महिलाएं, पुरुष, बच्चे और युवा पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीत गाते नजर आए।
छठ व्रतियों ने अर्घ्य देने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया और प्रसाद का वितरण किया। इस दौरान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। छठ पर्व ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और लोकसंस्कृति का जीवंत उत्सव है।