1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 28 Jan 2026 08:19:58 AM IST
- फ़ोटो
Bihar police controversy : दरभंगा जिले के बेता थाना क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने बिहार पुलिस की कार्यशैली और महिला सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बेता थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार ने बीच सड़क पर एक महिला डॉक्टर के साथ न सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि धक्का-मुक्की और धमकी देकर अपनी वर्दी की ताकत का खुलेआम प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार, शहर की जानी-मानी वरिष्ठ चिकित्सक नातिनी और खुद डॉक्टर अपने ड्राइवर के साथ निजी वाहन से घर लौट रही थीं। इसी दौरान उनका वाहन कथित रूप से वन-वे सड़क में चला गया। यह एक सामान्य ट्रैफिक उल्लंघन था, जिसे चालान या कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाया जा सकता था। लेकिन आरोप है कि मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार ने कानून के दायरे में रहने के बजाय आपा खो दिया।
महिला डॉक्टर का आरोप है कि थाना प्रभारी ने बीच सड़क पर गाली-गलौज शुरू कर दी, ड्राइवर को धक्का मारा और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके साथ भी बदसलूकी की गई। वीडियो में थाना प्रभारी का उग्र व्यवहार साफ देखा जा सकता है, जहां वे ऊंची आवाज में अपशब्द कहते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर का दावा है कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि थाना प्रभारी ने डराने की कोशिश तक की।
इस घटना ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ लिया है क्योंकि पीड़िता एक महिला डॉक्टर हैं और उनका परिवार समाज में सम्मानित माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एक पढ़ी-लिखी महिला डॉक्टर के साथ सार्वजनिक स्थान पर ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार पर इस तरह के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी उन पर पत्रकारों से बदसलूकी और अभद्र व्यवहार के आरोप लग चुके हैं। उन मामलों में भी शिकायतें वरीय अधिकारियों तक पहुंची थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही दरभंगा दौरे पर आने वाले हैं और वे लगातार “सुशासन” का संदेश देते रहे हैं। ऐसे में वायरल वीडियो और लगाए गए आरोप उस सुशासन की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। आम जनता पूछ रही है कि क्या वर्दी में बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर है, या फिर कानून सबके लिए बराबर है?
पीड़ित महिला डॉक्टर ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना है।
वहीं, जब इस पूरे मामले को लेकर संबंधित वरीय पदाधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यही है कि क्या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा, या फिर वास्तव में पुलिस विभाग अपनी साख बचाने के लिए कड़ा कदम उठाएगा। फिलहाल, पीड़ित महिला डॉक्टर की जुबानी सामने आए सच और वायरल वीडियो ने पुलिस सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है, और फैसले की निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।