Patna police : पटना पुलिस के थानेदार और IO को नोटिस, कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को लगाई फटकार

पटना कोर्ट ने सालिमपुर में किशोर को हथकड़ी पहनाकर पेश करने पर पुलिस को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने थानेदार और IO से कारण बताने को कहा और नियमों के पालन पर सख्ती जताई।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 22 Dec 2025 01:08:08 PM IST

Patna police : पटना पुलिस के थानेदार और IO को नोटिस, कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को लगाई फटकार

- फ़ोटो

Patna police : पटना के सालिमपुर थाना क्षेत्र में एक किशोर को हथकड़ी लगाकर कोर्ट में पेश करने के मामले ने प्रशासन और पुलिस दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी है। कोर्ट ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए सालिमपुर थाने के थानेदार और जांच अधिकारी (IO) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किशोर को बालिग बताकर पेश करना और हथकड़ी लगाना पुलिस की बड़ी चूक है।


घटना का मुख्य कारण लखीपुर गांव के किसान कन्हैया कुमार की हत्या के बाद उत्पन्न स्थिति है। 16 दिसंबर को कन्हैया कुमार फसल देखने गए थे, लेकिन कुछ देर बाद वह लापता हो गए। कुछ दिनों बाद उनका शव गंगा नदी से बरामद किया गया, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए और पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया और उन्हें न्यायालय में पेश किया।


पेशी के दौरान यह मामला और अधिक गंभीर हुआ जब पता चला कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में एक किशोर भी शामिल था। किशोर के हाथ में हथकड़ी लगी थी और वह काफी डरा हुआ दिखाई दे रहा था। उसने न्यायालय को बताया कि पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की है और इसी वजह से वह 11वीं की परीक्षा नहीं दे पाया। यह सुनकर एसीजेएम की नजर किशोर पर पड़ी और उन्होंने तुरंत इस मामले की गंभीरता को समझा।


जांच में सामने आया कि पुलिस ने किशोर को बालिग बताकर कोर्ट में पेश किया, जबकि उसे जुवेनाइल कोर्ट के पास भेजना आवश्यक था। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की जानकारी लिखित रूप में नहीं दी गई, जो कानून के तहत एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। न्यायालय ने इस चूक को गंभीरता से लिया और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को संतोषजनक नहीं पाया।


कोर्ट ने पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गिरफ्तारी के बाद प्रत्येक व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी और कारण लिखित रूप में न्यायालय को दी जानी चाहिए। इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिससे न्यायालय नाराज है। कोर्ट ने सालिमपुर थाने के थानेदार और IO को नोटिस जारी कर 7 दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा है।


न्यायालय ने ग्रामीण एसपी और एसडीपीओ को भी निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि कोर्ट के आदेशों का पालन हर हाल में किया जाए। कोर्ट ने कहा कि किशोरों के मामले में विशेष सावधानी बरती जाए और किसी भी बालक को बाल न्यायालय के बजाय सामान्य अदालत में पेश करना गंभीर अपराध है।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि किसान कन्हैया कुमार की हत्या ने पूरे इलाके में तनाव फैला दिया था। पुलिस पर हमला करने वाले ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई करते समय किशोर को गलत तरीके से पेश करना प्रशासन के लिए और परेशानी का कारण बन गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन करना पुलिस का कर्तव्य है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


इस मामले में यह भी सामने आया कि किशोर को हथकड़ी लगाकर पेश करने से उसकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा। किशोर ने कोर्ट को बताया कि पुलिस की कार्रवाई के कारण उसे परीक्षा से वंचित होना पड़ा और वह अत्यंत भयभीत था। न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।


पटना कोर्ट का यह रुख यह संकेत देता है कि प्रशासन और पुलिस को किशोर अपराधियों के मामले में विशेष संवेदनशीलता दिखानी होगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बालक होने के बावजूद यदि किसी को कोर्ट में पेश करना आवश्यक हो तो उसे जुवेनाइल न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए और हथकड़ी का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।


इस मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की इस लापरवाही की समीक्षा की जाएगी। सालिमपुर थानेदार और IO को नोटिस का जवाब देने के लिए निर्दिष्ट समयसीमा में कोर्ट में पेश होना होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


इस पूरे मामले से स्पष्ट है कि किशोर अपराधियों के साथ पुलिस की कार्रवाई में नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। अदालत की सख्ती और पुलिस की चूक ने इस घटना को प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर बना दिया है। अब स्थानीय पुलिस प्रशासन और थानेदारों के लिए यह मामला एक सबक साबित होगा कि कानून और न्यायालय के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।