Bihar news : NEET छात्रा दुष्कर्म-हत्या केस : डीएनए जांच से खुलेगा राज, 40 लोगों के नमूने लिये गए; इस दिन तक रिपोर्ट आने की संभावना

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। पुलिस ने सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट शुरू किया है, जिसमें जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए संदिग्धों का मिलान किया जाएगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 28 Jan 2026 07:55:46 AM IST

Bihar news : NEET छात्रा दुष्कर्म-हत्या केस : डीएनए जांच से खुलेगा राज, 40 लोगों के नमूने लिये गए; इस दिन तक रिपोर्ट आने की संभावना

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Bihar news : पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जांच को निर्णायक मोड़ देने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों ने डीएनए परीक्षण का सहारा लिया है। इस क्रम में कुल 40 लोगों के खून के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं, जिनमें मृतका के कुछ नजदीकी रिश्तेदार भी शामिल हैं। जांच का उद्देश्य जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए मृतका और संदिग्धों के डीएनए का मिलान करना है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।


मंगलवार को डीएनए जांच की प्रक्रिया के तहत कई लोगों के रक्त नमूने लिए गए। अधिकारियों के अनुसार, जिन व्यक्तियों का डीएनए प्रोफाइल घटनास्थल से मिले जैविक साक्ष्यों से मेल खाएगा, उन्हें ही आरोपित माना जाएगा। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रारंभिक जांच में कई तरह के संदेह उभरे थे और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के अभाव में वैज्ञानिक प्रमाण जुटाना आवश्यक हो गया था।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों और फॉरेंसिक जानकारों का कहना है कि डीएनए परीक्षण अत्यंत विश्वसनीय और वैज्ञानिक पद्धति है। इसमें सबसे पहले नमूनों को मानक प्रोटोकॉल के तहत सावधानीपूर्वक संग्रहित किया जाता है, ताकि किसी तरह का संदूषण न हो। इसके बाद इन नमूनों को परीक्षण के लिए राज्य के बाहर स्थित अत्याधुनिक फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। बाहरी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग और प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया पूरी होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लग सकता है।


फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, जीनोम सिक्वेंसिंग के माध्यम से डीएनए के विशिष्ट हिस्सों का विश्लेषण किया जाता है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि दो नमूने एक ही व्यक्ति से संबंधित हैं या नहीं। इस प्रक्रिया से जैविक संबंधों की पहचान, संदिग्धों की उपस्थिति की पुष्टि और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलती है। यही वजह है कि गंभीर अपराधों की जांच में डीएनए परीक्षण को निर्णायक साक्ष्य माना जाता है।


छात्रा की मौत के बाद से ही परिजनों ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की थी। उनका कहना है कि मामला सामान्य नहीं है और इसके पीछे कई सवाल अनुत्तरित हैं। डीएनए जांच शुरू होने से परिजनों को उम्मीद जगी है कि सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी वैज्ञानिक रिपोर्टों का इंतजार कर रहे हैं।


इस बीच, नीट की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।


जांच एजेंसियों का दावा है कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। यदि किसी का डीएनए मिलान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से होता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। फिलहाल, पूरा मामला डीएनए रिपोर्ट पर टिका हुआ है, जिसे इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझाने की कुंजी माना जा रहा है।