Bihar Assembly Election : बिहार चुनाव में दुर्गति के बाद आरजेडी में सिर फुटौवल: पार्टी के बड़े नेता ने नेतृत्व के खिलाफ खोला मार्चा, टिकट बंटवारे में हुआ बड़ा खेल!

बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर मची हलचल अब खुलकर सामने आने लगी है। टिकट वितरण को लेकर पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र के तीखे बयान ने राजद की अंदरूनी राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 24 Jan 2026 12:09:12 PM IST

Bihar Assembly Election : बिहार चुनाव में दुर्गति के बाद आरजेडी में सिर फुटौवल: पार्टी के बड़े नेता ने नेतृत्व के खिलाफ खोला मार्चा, टिकट बंटवारे में हुआ बड़ा खेल!

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Bihar Assembly Election : बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर उठ रही असंतोष की आवाजें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र के ताजा बयान ने राजद के अंदरूनी हालात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टिकट वितरण को लेकर उन्होंने अपनी ही पार्टी और नेतृत्व के फैसलों पर नाराजगी जताई है, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चुनावी हार के बाद राजद में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।


दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जो पटना का बताया जा रहा है। इसमें भाई वीरेंद्र दिनारा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए पार्टी के फैसलों पर खुलकर सवाल करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं और विजय मंडल एक समय एक साथ विधायक रह चुके हैं। भाई वीरेंद्र का कहना है कि जब आखिरकार यादव समाज के उम्मीदवार को ही टिकट देना था, तो फिर सिटिंग विधायक विजय मंडल का टिकट क्यों काटा गया। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि विजय मंडल में आखिर ऐसी कौन-सी कमी थी, जिसके कारण पार्टी ने उनका टिकट काटने का फैसला किया।


भाई वीरेंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के भीतर विजय मंडल का टिकट बचाने के लिए पूरी लड़ाई लड़ी थी। उनके मुताबिक, विजय मंडल का टिकट नहीं काटा जाना चाहिए था, क्योंकि वे एक सिटिंग विधायक थे और क्षेत्र में उनकी पकड़ भी थी। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उनका टिकट काटकर किसी दूसरे उम्मीदवार को मौका दिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी को दिनारा सीट पर हार का सामना करना पड़ा।


अपने बयान में भाई वीरेंद्र ने यह आरोप भी लगाया कि कई जगहों पर बाहरी लोगों को टिकट दे दिया गया, जो संबंधित जिले के नहीं थे। उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ ऐसे नेता हैं, जो नाम के समाजवादी हैं, लेकिन तीन-तीन जिलों में अपनी पकड़ और प्रभाव बनाए हुए हैं। उनका इशारा उन नेताओं की ओर था, जो कैमूर, रोहतास और आसपास के इलाकों में टिकट वितरण को प्रभावित करते रहे हैं।


भाई वीरेंद्र ने तल्ख लहजे में कहा कि कुछ लोग कैमूर भी “जोतते” हैं, रोहतास भी और आरा तक में दखल रखते हैं। ऐसे में अगर किसी भी पार्टी में टिकट कुछ चुनिंदा लोगों के कहने पर बांटे जाएंगे, तो उस पार्टी का यही हाल होगा, जो आज राजद का हुआ है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर हमला माना जा रहा है।


गौरतलब है कि राजद नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद दावा किया था कि पार्टी को वोट चोरी और धांधली के जरिए हराया गया है। हालांकि, भाई वीरेंद्र के बयान से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर कई नेता हार की असली वजह टिकट वितरण और गलत रणनीति को मान रहे हैं। यही कारण है कि अब हार के बाद असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।


दिनारा विधानसभा सीट की बात करें तो यहां से विजय मंडल ने वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर पहली बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह को 8228 मतों के अंतर से हराया था। इस जीत के बाद विजय मंडल को क्षेत्र में एक मजबूत नेता के रूप में देखा जाने लगा था। बावजूद इसके, 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया और उनकी जगह शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को उम्मीदवार बनाया।


चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह फैसला उल्टा पड़ता दिखा। शशि शंकर कुमार को दिनारा सीट पर हार का सामना करना पड़ा और राजद इस महत्वपूर्ण सीट को गंवा बैठी। अब इसी मुद्दे को लेकर भाई वीरेंद्र ने सवाल उठाए हैं और पार्टी के भीतर नाराजगी जाहिर की है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाई वीरेंद्र का बयान केवल एक व्यक्ति की नाराजगी नहीं है, बल्कि यह राजद के भीतर पनप रहे व्यापक असंतोष का संकेत है। चुनावी हार के बाद जब पार्टी आत्ममंथन के दौर से गुजर रही है, ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के इस तरह के बयान नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं।


फिलहाल, भाई वीरेंद्र के बयान के बाद राजद की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को किस तरह संभालता है और क्या टिकट वितरण को लेकर उठे सवालों पर कोई ठोस आत्ममंथन करता है या नहीं।