1st Bihar Published by: SANT SAROJ Updated Mar 24, 2026, 10:45:28 AM
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Bihar mutation scam : सुपौल जिले में सरकारी जमीन के परिमार्जन को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मामले में सुपौल सदर के तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) आनंद कुमार मंडल के खिलाफ सदर थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दलालों के साथ मिलीभगत कर सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर किया।
यह पूरा मामला शहर के लोहियानगर चौक स्थित खाता संख्या 458 की जमीन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन परिमार्जन की प्रक्रिया के दौरान इसमें बदलाव कर दिया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर जमीन की प्रकृति बदलने की कोशिश की गई।
जैसे ही इस गड़बड़ी की जानकारी जिला प्रशासन को मिली, पूरे मामले की जांच शुरू कराई गई। प्रारंभिक जांच में अनियमितता सामने आने के बाद जिलाधिकारी सावन कुमार ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने तत्कालीन CO आनंद कुमार मंडल के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद सदर थाना में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, परिमार्जन के नाम पर सरकारी दस्तावेजों में बदलाव किया गया, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इस पूरे प्रकरण में कुछ बिचौलियों और दलालों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। प्रशासन ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटा है और उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है। संबंधित दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परिमार्जन प्रक्रिया के दौरान किन-किन स्तरों पर गड़बड़ी हुई। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए। उन्होंने कहा है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को किसी भी हालत में नहीं बख्शा जाएगा।
इस घटना के सामने आने के बाद जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में इस तरह की हेराफेरी संभव है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में प्रशासन पर यह जिम्मेदारी भी है कि वह न केवल दोषियों पर कार्रवाई करे, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस मामले में किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आती है और प्रशासन किस तरह से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है।