बिहार के ‘सिल्क सिटी’ पर अमेरिका-ईरान तनाव का व्यापक असर, 25 करोड़ का ऑर्डर रद्द; बुनकरों के सामने गहराया संकट

Bihar News: अमेरिका-ईरान तनाव का असर बिहार के भागलपुर सिल्क उद्योग पर पड़ा है। करीब 25 करोड़ रुपये का निर्यात ऑर्डर रद्द होने से बुनकरों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 07, 2026, 6:31:01 PM

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत के व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। इसका सीधा असर बिहार के भागलपुर की प्रसिद्ध सिल्क इंडस्ट्री पर पड़ा है। विश्व प्रसिद्ध “सिल्क सिटी” भागलपुर के बुनकर इस अंतरराष्ट्रीय संकट से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।


भागलपुर में तैयार होने वाला सिल्क देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अमेरिका और खाड़ी देशों में भी निर्यात किया जाता है। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। स्थानीय बुनकरों के अनुसार हाल ही में करीब 25 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर अचानक रद्द कर दिया गया, जिससे बुनकरों की स्थिति और अधिक संकटपूर्ण हो गई है।


जब बुनकर बस्तियों का दौरा किया गया तो कई जगह लूम बंद मिले। बुनकर हेमंत कुमार और आलोक कुमार बताते हैं कि कोरोना काल के बाद से ही इस उद्योग की स्थिति कमजोर हो गई थी। इसके बाद विभिन्न देशों में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण व्यापार और प्रभावित हुआ। पहले यहां का तैयार माल बांग्लादेश भी जाता था, लेकिन वहां की स्थिति बिगड़ने के कारण वह बाजार भी लगभग बंद हो गया है।


बुनकरों का कहना है कि वे धीरे-धीरे स्थिति संभालने की कोशिश ही कर रहे थे कि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच शनिवार रात करीब 25 करोड़ रुपये का ऑर्डर रद्द हो गया। इसके अलावा अमेरिकी नीतियों और टैरिफ का भी व्यापार पर असर पड़ा है।


हेमंत कुमार का कहना है कि जब भी बुनकर अपने काम को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तब कोई न कोई संकट सामने आ जाता है। कभी विदेशों में भागलपुर सिल्क की धूम थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कई बुनकर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं और भविष्य में लूम बेचकर गुजारा करने की नौबत आ सकती है। भागलपुर में तसर, मुगा, कोटा, मटका, मलवरी और अरंडी जैसे कई प्रकार के सिल्क कपड़े तैयार किए जाते हैं। लेकिन मौजूदा संकट के कारण इस पारंपरिक उद्योग का अस्तित्व धीरे-धीरे खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।