1st Bihar Published by: HARERAM DAS Updated Thu, 12 Feb 2026 06:35:42 PM IST
कोर्ट ने सुनाई सजा - फ़ोटो Reporter
Bihar Crime News: बिहार के बेगूसराय में वर्ष 2019 की दिवाली की रात सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा गांव में हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर कांड में बेगूसराय न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास सिंह को फांसी की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बेउर जेल में बंद दोषी को मृत्युदंड का आदेश दिया। इस फैसले के साथ ही जिले में न्यायिक इतिहास का एक नया अध्याय जुड़ गया है। बेगूसराय में पहली बार किसी दोषी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फांसी की सजा सुनाई गई है।
जानकारी के अनुसार, चार बीघा जमीन विवाद को लेकर आरोपी विकास सिंह ने वर्ष 2012 में अपने चाचा अरुण सिंह की हत्या कर दी थी। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा पहले ही मिल चुकी है। वर्ष 2017 में अपनी चाची मुन्नी देवी की हत्या का मामला भी न्यायालय में लंबित है। बताया जाता है कि इन दोनों मामलों में मृतक कुणाल सिंह प्रमुख गवाह थे। आरोप है कि विकास सिंह गवाही नहीं देने को लेकर अपने भाई पर दबाव बना रहा था। इनकार करने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 2019 में तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया।
27 अक्टूबर 2019 की रात करीब 10 बजे आरोपी ने अपने भाई कुणाल सिंह, भाभी कंचन देवी और 17 वर्षीय भतीजी सोनम कुमारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद घर से निकलते समय उसका सामना भतीजे शिवम कुमार से हुआ। आरोप है कि आरोपी ने शिवम के सीने पर पिस्तौल सटाकर गोली चलाई, लेकिन संयोगवश गोली नहीं चली और उसकी जान बच गई। शिवम जब घर के अंदर गया तो उसने अपने माता-पिता और बहन को खून से लथपथ पाया। दिवाली की खुशियां पलभर में मातम में बदल गई थीं।
इस चर्चित मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी राम प्रकाश यादव ने प्रभावी पैरवी की। अदालत में बाबू साहब सिंह, विजय सिंह, डॉक्टर संजय कुमार, सत्यम कुमार, प्रत्यक्षदर्शी शिवम कुमार तथा अनुसंधानकर्ता मनीष कुमार सिंह समेत कई महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही कराई गई। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
इस ऐतिहासिक फैसले ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि गंभीर अपराध करने वालों को कानून बख्शेगा नहीं। बेगूसराय न्यायालय का यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि जिले में कानून व्यवस्था को लेकर भी एक सख्त संकेत माना जा रहा है। फैसले के बाद न्यायालय परिसर और पूरे जिले में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।