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साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: किराये पर लिए जा रहे बैंक खाते, 3.5% कमीशन के लालच में फंस रहे लोग

Cyber Fraud: बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अपराधियों ने लोगों के बैंक खातों को किराये पर लेकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। ठग खाताधारकों को 3 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन का लालच देकर उनके खातों के जरिए द

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 19, 2026, 5:09:28 PM

साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: किराये पर लिए जा रहे बैंक खाते, 3.5% कमीशन के लालच में फंस रहे लोग

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Cyber Fraud: बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। इस नए तरीके में साइबर अपराधी सीधे लोगों को निशाना बनाने के बजाय उनके बैंक खातों को किराये पर लेकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर रहे हैं। ठग खाताधारकों को घर बैठे 3 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन का लालच देते हैं और उनके खातों के जरिए देशभर में ठगी की रकम ट्रांसफर कराते हैं।


जिला साइबर थाना पुलिस ने इस संगठित गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पिछले 12 दिनों के भीतर तीन संदिग्ध बैंक खातों का पता लगाया और उनसे जुड़े खाताधारकों को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बिहार पुलिस स्पेशल साइबर यूनिट से मिली सूचना के आधार पर की गई, जो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों से जुड़ी थी।


जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने फर्जी कंपनियों के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए। इसके बाद खाताधारकों से डेबिट कार्ड, चेकबुक और साइन किए हुए दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए जाते थे। जैसे ही ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर होती, उसे तुरंत निकाल लिया जाता या दूसरे खातों में भेज दिया जाता, जिससे लेन-देन का ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था।


पुलिस के अनुसार, इस मामले में अहियापुर थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी मो. फरीद आलम की भूमिका अहम रही। उसे 14 मार्च को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि उसके बैंक खाते में 16 राज्यों के 153 अलग-अलग खातों से ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अपना खाता 3.5 प्रतिशत कमीशन पर साइबर ठगों को किराये पर दिया था।


इसके अलावा, 6 मार्च को गायघाट थाना क्षेत्र के कमरथु गांव से देव कुमार और राजा कुमार को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि राजा की मदद से देव ने अपना बैंक खाता गिरोह को उपलब्ध कराया था। देव ने कबूल किया कि उसे इसके बदले 3.5 प्रतिशत कमीशन मिलता था।


इसी क्रम में रामपुरहरि थाना क्षेत्र के सलेमापुर गांव के अर्जुन कुमार और गोरीगामा गांव के रंधीर कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। रंधीर की मदद से अर्जुन ने अपना बैंक खाता ठगों को दिया था और इसके बदले उसे 3 प्रतिशत कमीशन मिलता था।


साइबर थाना के थानाध्यक्ष हिमांशु कुमार ने बताया कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा है और इसके तार देश के कई राज्यों में फैले हुए हैं। खातों को किराये पर लेने की यह नई रणनीति ठगों के लिए इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे वे खुद सीधे लेन-देन में शामिल नहीं दिखते और जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करते हैं।


पुलिस ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर देश के 20 राज्यों की साइबर पुलिस को भेज दी है। अब अन्य राज्यों की पुलिस भी इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, जिससे इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की संभावना बढ़ गई है।


जानकारी के मुताबिक, इन खातों के जरिए करीब 190 लोगों से साइबर ठगी की गई और करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। सभी मामलों में एक ही पैटर्न सामने आया फर्जी कंपनी बनाकर खातों में पैसे मंगाना और तुरंत उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देना।


साइबर डीएसपी ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि थोड़े से लालच में आकर अपना बैंक खाता किसी को देना गंभीर अपराध है। ऐसा करने वाले लोग अनजाने में ही साइबर ठगी जैसे बड़े अपराध का हिस्सा बन जाते हैं और कानूनी कार्रवाई का सामना करते हैं।


फिलहाल पुलिस इस गिरोह के सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जांच से यह साफ है कि यह नेटवर्क बड़े स्तर पर संचालित हो रहा है और इसमें संगठित तरीके से लोगों को फंसाया जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध ऑफर से दूर रहें।