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वाहन चोर गिरोह का किया पर्दाफाश, 5 शातिर गिरफ्तार; भारी मात्रा में चोरी के गाड़ियां बरामद

Bihar Crime News: गोपालगंज पुलिस ने वाहन चोरी गिरोह का भंडाफोड़ किया, 5 आरोपी गिरफ्तार, चोरी के वाहन और आपराधिक सामग्री बरामद।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 02, 2026, 7:42:29 PM

Bihar Crime News

- फ़ोटो Reporter

Bihar Crime News: गोपालगंज जिले में बढ़ती वाहन चोरी की घटनाओं के बीच महम्मदपुर थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक संगठित वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 5 पेशेवर अपराधियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से चोरी के कई वाहन तथा भारी मात्रा में अन्य सामानों को बरामद किया है।


जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल को महम्मदपुर थाना क्षेत्र के बगीश मोड़ पर नियमित वाहन जांच के दौरान पुलिस की नजर एक बिना नंबर प्लेट वाली संदिग्ध स्कॉर्पियो पर पड़ी। वाहन तेज रफ्तार में आ रहा था और पुलिस रुकने का संकेत देने पर चालक वाहन लेकर भागने लगा। तत्परता दिखाते हुए पुलिस टीम ने पीछा कर वाहन को रोक लिया। हालांकि चालक फरार हो गया, लेकिन वाहन में सवार दो आरोपियों—जितेंद्र कुमार और तबरेज आलम—को गिरफ्तार कर लिया गया।


जांच में सामने आया कि यह स्कॉर्पियो चोरी की थी और दोनों आरोपी एक संगठित वाहन चोर गिरोह से जुड़े थे। गिरोह के सदस्य चोरी के वाहनों का रंग बदलते, इंजन और चेसिस नंबर में हेरफेर करते, फर्जी कागजात तैयार करते और नंबर प्लेट बदलकर उन्हें बाजार में बेचते थे।


पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ-2 राकेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर छापेमारी कर गिरोह के अन्य तीन सदस्यों—मुन्ना कुमार यादव, लक्ष्मण राय और मनोज राय—को भी गिरफ्तार किया।


गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने विभिन्न स्थानों से चोरी के 4 बोलेरो, 3 मोटरसाइकिल, 1 स्कॉर्पियो, 1 लैपटॉप, 3 प्रिंटर, 1 इनवर्टर, 1 बैटरी, 4 मोबाइल फोन, 9 स्मार्ट कार्ड, 50 फर्जी नंबर प्लेट और 1 गैस कटर बरामद किए।


एसपी विनय तिवारी ने बताया कि पिछले तीन महीनों से जिले में वाहन चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। गिरफ्तार आरोपियों में एक गोपालगंज का निवासी है, जबकि अन्य पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर जिले से हैं। एसपी ने बताया कि गिरोह चोरी के वाहनों को फर्जी नंबर प्लेट और कागजात के जरिए बेचता था और इनका उपयोग गैरकानूनी गतिविधियों में किया जाता था।