170 दिन बाद सोनम वांगचुक को राहत, केंद्र ने हटाया NSA; जोधपुर जेल से जल्द होगी रिहाई

केंद्र सरकार ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर लगा NSA हटा दिया है। लेह हिंसा के आरोप में 26 सितंबर 2025 से हिरासत में रहे वांगचुक 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहा होंगे।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 14, 2026, 12:54:48 PM

170 दिन बाद सोनम वांगचुक को राहत, केंद्र ने हटाया NSA; जोधपुर जेल से जल्द होगी रिहाई

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केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर Sonam Wangchuk  पर लगाया गया National Security Act (NSA) हटा दिया है। गृह मंत्रालय के आदेश के बाद यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा और करीब 170 दिनों से जोधपुर जेल में बंद वांगचुक की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।


गृह मंत्रालय के मुताबिक, वांगचुक ने NSA के तहत अपनी हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है। इसके बाद केंद्र ने उनकी नजरबंदी समाप्त करने का निर्णय लिया। लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक घटनाओं के बाद 26 सितंबर को वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया था। प्रशासन का आरोप था कि उन्होंने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान लोगों को उकसाया और हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई।


दरअसल, उस समय लद्दाख में राज्य के दर्जे की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे थे। आंदोलन के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई थी। इन झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 90 लोग घायल हुए थे। प्रशासन का कहना था कि इन घटनाओं के पीछे वांगचुक की भूमिका की जांच के आधार पर उन्हें NSA के तहत हिरासत में लिया गया।


राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार को ऐसे लोगों को बिना मुकदमे के हिरासत में रखने का अधिकार होता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा माना जाता है। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। करीब छह महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बाद अब केंद्र सरकार के फैसले से वांगचुक की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।


शिक्षा सुधार के लिए जाना जाता है वांगचुक का काम

सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के लेह जिले के अल्ची गांव के पास हुआ था। उनके गांव में उस समय स्कूल की सुविधा नहीं थी, इसलिए नौ साल की उम्र तक उन्हें औपचारिक शिक्षा नहीं मिल सकी। इस दौरान उनकी मां ने घर पर ही उन्हें बुनियादी पढ़ाई सिखाई।


बाद में उन्हें श्रीनगर भेजा गया, जहां एक स्कूल में उनका दाखिला कराया गया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली के विशेष केंद्रीय विद्यालय में भी शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की।


इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वांगचुक ने 1988 में अपने भाई और पांच साथियों के साथ मिलकर Students Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य लद्दाख के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना था।


इसके तहत सासपोल स्थित एक सरकारी हाई स्कूल में शिक्षा सुधार के कई प्रयोग किए गए। बाद में SECMOL ने ‘ऑपरेशन न्यू होप’ नाम से एक अभियान शुरू किया। इस अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार, स्थानीय जरूरतों के अनुसार पाठ्यपुस्तकों का निर्माण, शिक्षकों के प्रशिक्षण और गांव स्तर पर शिक्षा समितियों के गठन की पहल की गई।


इसके अलावा वांगचुक ने जून 1993 में ‘लद्दाख्स मेलोंग’ नाम की एक प्रिंट मैगजीन की शुरुआत भी की थी। अगस्त 2005 तक वह इसके संपादक रहे। यह लंबे समय तक लद्दाख की एकमात्र प्रिंट मैगजीन मानी जाती थी।साल 2004 में उन्हें लद्दाख हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा सलाहकार भी नियुक्त किया गया था। शिक्षा सुधार और सामाजिक कार्यों के कारण वांगचुक को लद्दाख में एक प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। अब केंद्र सरकार द्वारा NSA हटाए जाने के फैसले के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की संभावना है।