बिहार : राज्यभर के शिक्षक आज करेंगे प्रदर्शन, विधानसभा कूच के साथ होगा विधायकों के आवास का घेराव

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 11, 2023, 7:54:30 AM

बिहार : राज्यभर के शिक्षक आज करेंगे प्रदर्शन, विधानसभा कूच के साथ होगा विधायकों के आवास का घेराव

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PATNA : बिहार में आज शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले शिक्षक बहाली नियमावली और डोमिसाइल नीति को लेकर राज्य के शिक्षक अभ्यर्थी बिहार विधानसभा के समक्ष धरना प्रदर्शन करेंगे।इस दौरान वो लोग गर्दनीबाग धरना स्थल से निकलर विधानसभा कुच करेंगे और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ सवाल करेंगे। 


दरअसल, बिहार विधान मंडल के मानसून सत्र का दूसरा दिन है वहीं दूसरी तरफ नीतीश सरकार की नई शिक्षक नियमावली का विरोध करने के लिए शिक्षक अभ्यर्थियों का आज पटना में भारी जुटान हुआ है। बिहार लोक सेवा आयोग टीचर भर्ती नियमावली के विरोध में आए शिक्षक अभ्यर्थी और संविदा टीचरों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में अब आज अपनी मांगों को लेकर राजयभर के करीब एक लाख शिक्षक विधानसभा का घेराव भी करेंगे।


वहीं, इसको लेकर शिक्षकों का कहना है कि 2020 में विधानसभा चुनाव के वक्त बिना शर्त नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने का वादा किया था। अब ये लोग अपने वादों से मुकर रहे हैं। ऐसे में आज करीब करीब 1 लाख टीचर विधानसभा कूच करेंगे। शिक्षक अभ्यर्थियों की मांग है कि बिहार में डोमिसाइल नीति को फिर से लागू कर देना चाहिए। शिक्षकों की कई मांगे हैं। बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर प्रारंभिक शिक्षक संघ और तमाम शिक्षक संगठन आज विधासनभा का घेराव करने के लिए गर्दनीबाग से सुबह कूच करेंगे। इस दौरान विधायकों के आवास का भी घेराव करने का प्लान है। संविदा शिक्षकों के प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए  ये लोग सभी राजनीतिक दल से मिलकर प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटा रहे हैं।


आपको बताते चलें कि, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सोमवार को हुई महागठबंधन विधानमंडल दल की बैठक में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी कई दलों के विधायकों ने संशोधन की बात उठाई। कांग्रेस की ओर से भी इस बाबत बातें रखी गईं। सीपीआई, सीपीएम ने नई नियुक्ति नियमावली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आश्वासन दिया कि बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र (14 जुलाई तक) बाद सभी दल बैठकर इसपर विमर्श कर लेते हैं।