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चुनाव के पहले RJD विधायक को आयी सड़क की याद, बनवाने की मांग को लेकर बैठे आमरण अनशन पर

1st Bihar Published by: Ganesh Samrat Updated Jun 14, 2020, 1:36:44 PM

चुनाव के पहले RJD विधायक को आयी सड़क की याद, बनवाने की मांग को लेकर बैठे आमरण अनशन पर

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PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव के पहले नेता अब अनलॉक होने लगे हैं। इस बीच नेताओं को अपने क्षेत्र की समस्याएं भी नजर आने लगी हैं। नेताओं को जनता की चिंता सताने लगी है। बिहार में बढ़ते चुनावी फीवर के बीच नेताजी अब एक्टिव मोड में आ गये हैं। हरसिद्धि के आरजेडी विधायक राजेन्द्र कुमार राम अपने इलाके में सड़क बनवाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गये हैं। 


गायघाट चौक से हरसिद्धि प्रखंड मुख्यालय को जाने वाली जर्जर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि विधान सभा क्षेत्र के विधायक राजेन्द्र कुमार राम आमरण अनशन पर बैठ गये हैं। विधायक का कहना है कि सरकार जब तक इस मामले में संज्ञान नहीं लेगी वे यहां आमरण अनशन पर डटे रहेंगे। विधायक का कहना है कि वे बार-बार इस मुद्दे को सरकार के सामने उठा चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी। सड़क की स्थिति सालों से जर्जर है । 


विधायक का कहना है कि सदन के अंदर से लेकर बाहर तक मैं सालों से सड़क निर्माण के लिए चक्कर लगा रहा हूं पर सरकार की लापरवाही की वजह से प्रखंड मुख्यालय जाने वाली सड़क का निर्माण नहीं हो सका । विधायक का कहना है कि मजबूर होकर मुझे आमरण अनशन पर बैठना पड़ा है। उन्होनें कहा कि मुझे उम्मीद है सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सड़क निर्माण का कदम उठाएगी। उन्होनें कहा कि कम से कम इस सड़क को बरसात के पहले मोटरबुल कर दे तो भी वे अनशन तोड़ देंगे। उन्होनें कहा कि मेरी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक निविदा की प्रकिया जारी नहीं की जाती।


विधायक जी की चिंता तो लाजिमी है। क्षेत्र की सड़क की चिंता वे नहीं करेंगे तो आखिर कौन करेगा लेकिन सवाल आखिर ये उठता है कि जब सड़क सालों से जर्जर थी आखिर विधायक जी अब तक कर क्या रहे थे। वे कहते है कि मैं सालों से इसे बनवाने की कोशिश के लिए दौड़ रहा था ये भी ठीक है तो अब आमरण अनशन की क्या जरूरत आ पड़ी  अभी भी प्रयास करते रहते। लेकिन अब उन्हें ज्यादा ही चिंता सता रही है क्योंकि अब मौका चुनाव का जो आ गया है। जनता के दरबार में पेशी होगी तो आखिर क्या जवाब देंगे सो विधायक जी अगर आमरण अनशन नहीं करें तो आखिर करें भी क्या ?