1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 24, 2023, 5:26:03 PM
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PATNA: शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के फैसलों से शिक्षकों और विभाग के अन्य कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। खुद शिक्षा मंत्री चंद्रशेकर भी आरोप लगा चुके हैं कि केके पाठक उनकी बात नहीं सुनते हैं। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी ने इसको लेकर एक बार फिर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुझाव दिया है कि अगर केके पाठक उन्हें इतना ही पसंद हैं तो उन्हें अपना सलाहकार क्यों नहीं बना लेते हैं।
सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि शिक्षा विभाग को सनकी तरीके से हांका जा रहा है। विभाग में मंत्री तक की नहीं चलती है और नियम-कानून से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि बीते 20 जुलाई को संगीत शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित मामले में शिक्षा विभाग ने दिल्ली से बुलाये गए वकीलों को पटना हाईकोर्ट में पेश कर राज्य के अटार्नी जनरल पी के शाही तक को असहज स्थिति में डाल दिया। इस पर एजी को खेद प्रकट करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि बिहार न्यायिक अधिकारी अधिनियम-2023 के नियम-13 के अनुसार कोई भी सरकारी विभाग एजी की अनुमति के बिना बिहार से बाहर के किसी वकील से पैरवी नहीं करा सकता। यदि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने नियम-कानून का पालन किया होता, तो हाईकोर्ट में सरकार की फजीहत न होती।
सुशील मोदी ने कहा कि शिक्षा विभाग की मनमानी पर सरकारी वकीलों ने ही न्यायपीठ के समक्ष आपत्ति की और एजी को स्वीकार करना पड़ा कि उनकी अनुमति के बिना बाहरी वकील बुलाये गए थे। यदि नीतीश कुमार को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का यही तौर-तरीका पसंद है, तो उन्हें ही मुख्यमंत्री का सलाहकार बना लेना चाहिए।