1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 28, 2023, 9:41:42 AM
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PATNA : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की ' जीभ काटकर लाने' वाले बयान को लेकर मुश्किलों में फंसे भाजपा नेता को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर प्राथमिकी को निरस्त कर दिया है।
दरअसल, भाजपा नेता के खिलाफ आईपीसी की धारा 500, 501, 504, 506 और एससी - एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. अंशुमन की एकलपीठ ने भाजपा नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया जाए।
वही इस मामले को लेकर भाजपा नेता के अधिवक्ता प्रिंस कुमार मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि प्राथमिकी सीआरपीसी की धारा 193 के तहत निर्धारित कानून के आलोक में खारिज कर देने योग्य है क्योंकि प्राथमिकी के शिकायतकर्ता स्वयं पीड़ित नहीं है बल्कि उन्होंने अपने दल के अध्यक्ष की ओर से यह आवेदन दायर किया है। जिसके बाद कोर्ट ने तत्वों के मद्देनजर भाजपा नेता गजेंद्र झा के खिलाफ दायर प्राथमिकी को निरस्त कर दिया।
मालूम हो कि, यह मामला साल 2021 का है जब एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने ब्राह्मणों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके इस बयान पर भाजपा के तत्कालिक प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य गजेंद्र धार ने पलटवार किया और मांझी के जीव काट कर लाने वाले को 11 लाख इनाम देने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद इनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई।
इधर, जीतन राम मांझी को लेकर इस तरह के बयान देने के बाद भाजपा के तरफ से अपने नेता पर कार्रवाई करते हुए उनको पार्टी से निकाल दिया गया था। इसके बाद अब इस मामले में कोर्ट ने भी भाजपा नेता को बड़ी राहत दी है।