अचानक फूट-फूटकर क्यों रोने लगीं मैथिली ठाकुर? बीजेपी विधायक का भावुक वीडियो हुआ वायरल

Maithili Thakur: जयपुर के ऐतिहासिक गोविंददेवजी मंदिर में दर्शन के दौरान बिहार की लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर भावुक हो गईं। भक्तिमय माहौल और भजनों की गूंज के बीच उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 09, 2026, 12:47:23 PM

Maithili Thakur

- फ़ोटो Social media

Maithili Thakur: बिहार के मधुबनी की बेटी, प्रख्यात लोक गायिका और दरभंगा के अलीनगर से बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर जयपुर के ऐतिहासिक गोविंददेवजी मंदिर में दर्शन के दौरान भावुक हो गईं। मंदिर के भक्तिमय माहौल और भजनों की गूंज ने उन्हें इतना भावुक कर दिया कि उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।


मैथिली ठाकुर अपने दोनों भाइयों ऋषभ और अयाची के साथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंची थीं। उसी दौरान मंदिर परिसर में भजन गूंज रहा था “आज तो नवेली राधा गोरल पूजण आई छै…”। भक्ति और संगीत से भरे उस माहौल में मैथिली खुद को संभाल नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े।


इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “आज तक मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था। जब मैं जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंची, तो वहां का वातावरण, भक्तों के भजन, घंटियों और तालियों की गूंज ने मन को इतना छू लिया कि मैं खुद को संभाल नहीं पाई। आंखों से आंसू बहते रहे और ऐसा लगा जैसे मन का सारा बोझ हल्का हो गया हो।”


मैथिली ठाकुर सिर्फ एक प्रसिद्ध गायिका ही नहीं, बल्कि अब सक्रिय राजनीति में भी हैं। पिछले साल उन्होंने बीजेपी के टिकट पर दरभंगा की अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इन दिनों मैथिली जयपुर में आयोजित ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ कार्यक्रम में भाग लेने पहुंची हैं। रविवार को उनका एक बड़ा म्यूजिक कंसर्ट भी प्रस्तावित है। मैथिली ठाकुर मैथिली, भोजपुरी और हिंदी के पारंपरिक लोकगीतों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं और उन्हें शास्त्रीय संगीत का भी प्रशिक्षण प्राप्त है।


इस दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी मैथिली ठाकुर और उनके भाइयों का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अपनी सुरीली आवाज से भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाली युवा विधायक मैथिली ठाकुर से मुलाकात कर खुशी हुई। साथ ही राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं के संरक्षण व संवर्धन पर सार्थक चर्चा भी हुई।