1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 05, 2026, 3:22:32 PM
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Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो दशक से अधिक लंबे कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की गईं, लेकिन महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में किए गए उनके कामों को विशेष रूप से याद किया जाएगा।
साल 2006 में नीतीश कुमार ने बिहार की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया। बाद में यही व्यवस्था नगर निकाय चुनावों में भी लागू की गई। इस निर्णय का असर यह हुआ कि गांव-गांव में महिला मुखिया और वार्ड सदस्य दिखाई देने लगीं। शुरुआत में “मुखिया पति” जैसे व्यंग्य सुनने को मिले, लेकिन समय के साथ महिलाओं ने खुद नेतृत्व संभाल लिया।
शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना और पोशाक योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत छात्राओं को साइकिल खरीदने के लिए उनके बैंक खातों में राशि दी गई। इन योजनाओं का बड़ा प्रभाव पड़ा और कुछ ही वर्षों में मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने वाले लड़कों और लड़कियों की संख्या लगभग बराबर हो गई। इसके साथ ही लड़कियों के लिए कई तरह की छात्रवृत्ति योजनाएं भी शुरू की गईं।
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने जीविका कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। विश्व बैंक से ऋण लेकर शुरू की गई इस योजना के तहत आज बिहार में करीब 10 लाख जीविका समूह सक्रिय हैं और उनसे एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से कई महिलाओं ने अपना व्यवसाय भी शुरू किया।
सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए कई फैसले लिए गए। राज्य के पुलिस बल में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिसके कारण आज देश में सबसे अधिक महिला पुलिसकर्मियों वाला राज्य बिहार बन गया है। इसके अलावा प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना शुरू की गई, जिसके तहत उद्योग स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है, जिसमें पांच लाख रुपये सब्सिडी के रूप में शामिल हैं।
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर विकास हुआ। Patna से शुरू हुए रोड प्रोजेक्ट के बाद राज्य में कई स्टेट हाईवे विकसित किए गए। एशियन डेवलपमेंट बैंक से ऋण लेकर सड़कों का व्यापक निर्माण हुआ और बड़ी संख्या में पुल बनाए गए।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़कों का विस्तार टोला स्तर तक किया गया। साथ ही ग्रामीण विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई और अब कई गांवों में 22–23 घंटे तक बिजली उपलब्ध होने लगी है। इन पहलों ने बिहार के विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।