1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 26, 2026, 5:33:48 PM
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Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर महीने दो बार यानी शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मार्च 2026 का महीना इस बार खास है, क्योंकि इस महीने तीन प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। ऐसे में भक्तों के लिए यह महीना बेहद शुभ माना जा रहा है। अब इस महीने का तीसरा और अंतिम प्रदोष व्रत आने वाला है, जिसे लेकर लोगों में खास उत्साह देखा जा रहा है।
कब है मार्च 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत?
पंचांग के अनुसार, मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 30 मार्च 2026, सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 मार्च सुबह 7:09 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 मार्च सुबह 6:55 बजे
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए 30 मार्च की शाम का समय पूजा के लिए उपयुक्त रहेगा।
सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, धन-धान्य और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करने और शिव मंत्रों का जाप करने से सभी प्रकार के दोष दूर होते हैं। विशेष रूप से यह व्रत मानसिक शांति और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करता है, उसकी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री
सोम प्रदोष व्रत की पूजा में जिन सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है, उनमें गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद, मिश्री, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत, धूप, दीपक, फल और मिठाई शामिल हैं। इसके अलावा पान, सुपारी, लौंग और इलायची का भी उपयोग पूजा में किया जाता है। सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है।
संपूर्ण पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। पूजा के अंत में दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती की जाती है और उनसे सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की जाती है।
व्रत का फल और आध्यात्मिक महत्व
सोम प्रदोष व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन की गई पूजा और व्रत से व्यक्ति को आत्मविश्वास, धैर्य और आंतरिक शक्ति मिलती है, जिससे वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर पाता है।
मार्च 2026 का यह अंतिम सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का एक विशेष अवसर है, जिसमें श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा जीवन को सुखमय बना सकती है। इस लिए