1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 02 Feb 2026 01:48:36 PM IST
- फ़ोटो
Handcuffed Students Exam : जहानाबाद जिले के रतनी प्रखंड अंतर्गत परिवेशका उच्च विद्यालय, शकुराबाद स्थित परीक्षा केंद्र पर सोमवार को एक बेहद असामान्य और चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिला। इस नजारे ने न केवल वहां मौजूद परीक्षार्थियों और शिक्षकों को हैरानी में डाल दिया, बल्कि कुछ देर के लिए परीक्षा केंद्र का माहौल भी चर्चा का विषय बन गया। आमतौर पर परीक्षा केंद्रों पर छात्र हाथ में कलम, प्रवेश पत्र और आत्मविश्वास लेकर पहुंचते हैं, लेकिन इस केंद्र पर दो परीक्षार्थी ऐसे पहुंचे जिनके एक हाथ में कलम और एडमिट कार्ड था, तो दूसरे हाथ में हथकड़ी।
हथकड़ी लगाए इन दोनों परीक्षार्थियों की पहचान आसिफ अंसारी और बिट्टू कुमार के रूप में हुई है। दोनों छात्र पुलिस कर्मियों पर हमला करने के एक मामले में आरोपी हैं और फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद उन्हें पुलिस अभिरक्षा में जेल से सीधे परीक्षा केंद्र लाया गया था, ताकि वे इंटरमीडिएट परीक्षा की पहली पाली में शामिल हो सकें।
जैसे ही पुलिस की कड़ी निगरानी में हथकड़ी पहने दोनों छात्र परीक्षा केंद्र परिसर में दाखिल हुए, वहां कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। अन्य परीक्षार्थी, अभिभावक और स्कूल स्टाफ इस दृश्य को देखकर अचंभित रह गए। देखते ही देखते यह दृश्य पूरे परिसर में चर्चा का विषय बन गया और लोग कानून, शिक्षा और परिस्थितियों के इस अनोखे मेल पर बातें करने लगे।
हालांकि, परीक्षा की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए स्कूल प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाई। परीक्षा केंद्र प्रबंधन ने दोनों छात्रों के लिए अलग से व्यवस्था की, ताकि अन्य परीक्षार्थियों की परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित न हो। पुलिस की मौजूदगी में दोनों छात्रों को एक अलग कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाई गई। इस दौरान पूरी सतर्कता बरती गई और परीक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन किया गया।
इस संबंध में विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया अदालत के आदेश के तहत की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून का पालन करते हुए और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखते हुए दोनों छात्रों को परीक्षा देने का अवसर दिया गया। प्राचार्य के अनुसार परीक्षा शांतिपूर्ण और पूरी तरह नियमानुसार संपन्न कराई गई, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई।
यह घटना न केवल जिले में चर्चा का विषय बनी, बल्कि इसने शिक्षा और कानून के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी पेश किया। इससे यह संदेश जाता है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत किसी भी छात्र को शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जाता, चाहे उसकी परिस्थितियां कितनी भी कठिन या असामान्य क्यों न हों। वहीं, यह घटना युवाओं के लिए एक सीख भी है कि कानून से टकराव किस तरह जीवन की सामान्य गतिविधियों को असाधारण बना सकता है।