Bihar News: CO के हड़ताल पर सख्त हुई सरकार, राजस्व अधिकारी को अंचल अधिकारी का प्रभार, सीओ से गाड़ी डोंगल वापस, सभी DM को भेजा गया पत्र...

बिहार राजस्व सेवा संघ द्वारा 02 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल के ऐलान के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है। राजस्व कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए सभी जिलों को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश जारी किए गए हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 02 Feb 2026 02:03:41 PM IST

Bihar News: CO के हड़ताल पर सख्त हुई सरकार, राजस्व अधिकारी को अंचल अधिकारी का प्रभार, सीओ से गाड़ी डोंगल वापस, सभी DM को भेजा गया पत्र...

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BIHAR BHUMI : बिहार राजस्व सेवा संघ द्वारा दिनांक 02 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन अवकाश (हड़ताल) पर जाने की घोषणा के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी. के. अनिल ने सभी जिला समाहर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि हड़ताल के बावजूद राजस्व प्रशासन का कार्य बाधित न हो और आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।


प्रधान सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बिहार राजस्व सेवा संघ के पदाधिकारियों ने अपने सभी सदस्यों से 02.02.2026 (सोमवार) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का आह्वान किया है। ऐसे में अंचल कार्यालयों के कार्य ठप होने की आशंका है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्णय लिए हैं।


पत्र में उल्लेख किया गया है कि 02 फरवरी 2026 सोमवार का दिन है और मुख्य सचिव, बिहार के पूर्व निर्देशों के अनुसार प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को सभी कार्यालयों में जनता दरबार आयोजित किया जाना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में यदि अंचलाधिकारी हड़ताल पर रहते हैं, तो अंचल मुख्यालय के वरीयतम हल्का कर्मचारी को प्रभारी अंचलाधिकारी का प्रभार सौंपा जाए। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अनुमंडल पदाधिकारी (RDO) अथवा भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) को भी अंचलाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है।


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 02 फरवरी 2026 से बिहार विधानमंडल का बजट अधिवेशन प्रारंभ हो रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में अंचल कार्यालयों का रिक्त रहना जनहित के प्रतिकूल होगा। राजस्व से जुड़े मामलों में आम जनता की निर्भरता अंचल कार्यालयों पर होती है, इसलिए किसी भी स्थिति में कार्यालयों का संचालन बाधित नहीं होना चाहिए।


वर्तमान में राज्य में दो समानांतर महाअभियान—ई-मापी तथा परिमार्जन प्लस/दाखिल-खारिज—चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का सीधा संबंध भूमि रिकॉर्ड, म्यूटेशन और आम नागरिकों के हितों से है। ऐसे में अंचल कार्यालयों को सुचारू रूप से चलाना प्रशासन की प्राथमिकता बताई गई है। पत्र में कहा गया है कि व्यापक लोकहित को ध्यान में रखते हुए तात्कालिक रूप से कार्यकारी व्यवस्था की जाए, ताकि इन योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित न हो।


प्रधान सचिव ने जिला समाहर्ताओं को यह भी छूट दी है कि यदि किसी जिले में हल्का कर्मचारी को प्रभार देने से बेहतर कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था संभव हो, तो उसका सुझाव मुख्यालय को अग्रसारित करते हुए जिले में लागू किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन भी बरतने को तैयार है।


इसके साथ ही सरकार ने हड़ताल पर जाने वाले अंचलाधिकारियों एवं राजस्व पदाधिकारियों के विरुद्ध कड़े प्रशासनिक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि 02 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले अधिकारियों से सरकारी डोंगल और वाहन तत्काल वापस ले लिए जाएं। इसके अलावा अंचल कार्यालयों में बक्सों और आलमारियों में संधारित राजस्व अभिलेखों की चाबियां भी संबंधित पदाधिकारियों से हस्तगत कर ली जाएं, ताकि सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और कार्य बाधित न हो।


सरकार ने यह भी कहा है कि हड़ताल पर जाने वाले पदाधिकारियों की सेवा अवधि को “नो वर्क, नो पे” (No Work No Pay) के आधार पर परिगणित करने पर विचार किया जाएगा। यानी हड़ताल की अवधि के लिए वेतन भुगतान नहीं किया जा सकता है। इसे हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।


अंत में प्रधान सचिव ने सभी जिला समाहर्ताओं से अनुरोध किया है कि अनिश्चितकालीन हड़ताल की अवधि तक अंचल कार्यालयों को चलाने के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आदेश की प्रतिलिपि ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, अपर समाहर्ताओं और भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।


कुल मिलाकर, बिहार राजस्व सेवा संघ की हड़ताल के ऐलान के बीच राज्य सरकार ने प्रशासनिक सख्ती और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए यह संकेत दे दिया है कि राजस्व और भूमि से जुड़े कार्य किसी भी हाल में ठप नहीं होने दिए जाएंगे, और जनहित सर्वोपरि रहेगा।