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Bihar News : जेल से निकलने को तैयार अनंत सिंह, बस एक कागज़ ने रोक दी रिहाई! जानिए कब बाहर आएंगे बाहुबली नेता और क्या है स्वागत की तैयारी

मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि कोर्ट बंद रहने के कारण उनकी रिहाई टल गई और अब सोमवार को जेल से बाहर आने की संभावना है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 20, 2026, 10:34:47 AM

 Bihar News : जेल से निकलने को तैयार अनंत सिंह, बस एक कागज़ ने रोक दी रिहाई! जानिए कब बाहर आएंगे बाहुबली नेता और क्या है स्वागत की तैयारी

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Bihar News : मोकामा से जेडीयू विधायक और चर्चित बाहुबली नेता अनंत सिंह के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन उन्हें रिहाई के लिए अब थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद बेलबॉन्ड की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिसके कारण उनकी रिहाई टल गई है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि अनंत सिंह सोमवार, 23 मार्च को बेऊर जेल से बाहर आ सकते हैं।


दरअसल, उनके वकील नवीन कुमार के अनुसार गुरुवार को जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को बेलबॉन्ड भरने की तैयारी थी, लेकिन पटना सिविल कोर्ट में रमजान के आखिरी जुमे के कारण अवकाश घोषित होने से प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद शनिवार और रविवार को भी अदालत बंद रहने के कारण अब यह प्रक्रिया सीधे सोमवार को ही पूरी हो पाएगी। ऐसे में सोमवार को ही उनकी रिहाई संभव मानी जा रही है।


अनंत सिंह फिलहाल पटना की बेऊर जेल में बंद हैं और उन पर अक्टूबर 2025 में हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड में संलिप्तता का आरोप है। यह घटना बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी, जब जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी।


गौरतलब है कि गिरफ्तारी के बावजूद अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हालांकि, निचली अदालतों से उन्हें राहत नहीं मिली और उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं। इसके बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें अंततः जमानत मिल गई।


इस बीच, 16 मार्च 2026 को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी अनंत सिंह चर्चा में रहे। वे जेल से बाहर आकर मतदान में शामिल हुए और जेडीयू उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया। मतदान के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया था कि अब वे सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं। उन्होंने कहा था कि भविष्य में चुनाव लड़ने की बजाय उनके बड़े बेटे राजनीतिक जिम्मेदारी संभालेंगे।


इतना ही नहीं, इससे पहले भी वे विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेने के लिए जेल से बाहर आए थे। उस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैर छूकर आशीर्वाद लिया था, जो काफी चर्चा का विषय बना था। शपथ ग्रहण के लिए उन्हें पटना सिविल कोर्ट से विशेष अनुमति मिली थी।


अनंत सिंह का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों और चर्चाओं से घिरा रहा है। मोकामा क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है और वे कई बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि, आपराधिक मामलों के चलते उनका नाम अक्सर सुर्खियों में रहा है।


अब सबकी नजर सोमवार पर टिकी है, जब उनके समर्थक उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि बेलबॉन्ड की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो लंबे समय बाद अनंत सिंह जेल से बाहर आकर एक बार फिर सक्रिय रूप में दिखाई दे सकते हैं, भले ही उन्होंने खुद चुनाव न लड़ने का संकेत दिया हो।