1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 11, 2026, 1:39:46 PM
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Bihar News : बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार के सात निश्चय-3 (2025-2030) कार्यक्रम के तहत प्रखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। इसी कड़ी में सरकार ने नेत्र रोग और ईएनटी (कान, नाक और गला) से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों के 1080 अतिरिक्त पद सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस फैसले से राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब आंख और कान-नाक-गला से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों या जिला मुख्यालयों का रुख नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें अपने ही प्रखंड स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
विभागीय जानकारी के मुताबिक राज्य के 534 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ 6 अन्य सीएचसी को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इस तरह कुल 540 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्र रोग विशेषज्ञ और ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ की नियुक्ति होगी। इस हिसाब से कुल 1080 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। अक्सर देखा जाता है कि आंखों की समस्या, कान में संक्रमण, सुनने में दिक्कत, नाक या गले से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीण मरीजों को दूर-दराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। कई बार आर्थिक और दूरी की वजह से मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते।
अब सरकार की नई पहल से इन समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। यदि प्रखंड स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे तो मरीजों को तत्काल जांच और इलाज मिल सकेगा। साथ ही गंभीर मामलों को समय रहते बड़े अस्पतालों के लिए रेफर भी किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के अनुरूप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ही कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इन विशेषज्ञों की तैनाती से सीएचसी स्तर पर ही कई प्रकार की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
अब सात निश्चय-3 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे को और व्यापक बनाते हुए नेत्र रोग और ईएनटी विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जा रही है। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता और बढ़ेगी तथा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अधिक व्यापक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना है, ताकि किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। प्रखंड स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की दूरी कम होगी और स्वास्थ्य व्यवस्था ज्यादा प्रभावी बन सकेगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। आने वाले समय में यह पहल बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।