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बिहार में LPG संकट का असर: स्कूल, हॉस्टल और आंगनबाड़ी में बंद पड़े गैस चूल्हे, लकड़ी पर बन रहा खाना

बिहार में एलपीजी गैस की किल्लत का असर अब स्कूलों, हॉस्टलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी दिखने लगा है। गैस सिलेंडर नहीं मिलने से कई जगह रसोइये और सेविकाएं लकड़ी के चूल्हे पर मिड-डे मील और बच्चों का भोजन बनाने को मजबूर हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 14, 2026, 8:41:14 PM

बिहार न्यूज

खाना बनाने की वैकल्पिक व्यवस्था - फ़ोटो सोशल मीडिया

PATNA: बिहार में LPG गैस की किल्लत का असर अब स्कूल, हॉस्टल और आंगनबाड़ी केंद्रों तक देखने को मिल रहा है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई जगहों पर खाने की व्यवस्था प्रभावित हो गई है। मजबूरीवश रसोइये और आंगनबाड़ी सेविकाएं लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने को विवश हैं। उनके समक्ष अब कोई चारा नहीं है सिवाय लकड़ी पर खाना बनाने के। क्योंकि गैस सिलेंडर मिल नहीं रहा है। 


इजराइनल और इरान के युद्ध और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। इसका असर बिहार के कई सरकारी शिक्षण संस्थानों पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्कूलों में मिड-डे मील अब लकड़ी के चूल्हों पर बनाया जा रहा है। वहीं राज्य के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में गैस सिलेंडर नहीं मिलने से सेविकाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


बताया जा रहा है कि बिहार में एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां छोटे बच्चों को रोजाना गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। आम तौर पर इन केंद्रों में गैस चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता है, लेकिन एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के कारण अब सेविकाएं लकड़ियां जलाकर खाना बनाने को मजबूर हैं। कई सेविकाओं का कहना है कि पिछले दस दिनों से सिलेंडर के लिए बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है।


सूत्रों के मुताबिक राज्य के लगभग आधे आंगनबाड़ी केंद्रों में गैस सिलेंडर की समस्या सामने आई है। हर केंद्र को गैस सिलेंडर के लिए करीब 910 रुपये की राशि मिलती है। परेशान सेविकाओं ने इस समस्या की जानकारी आईसीडीएस विभाग को भी दी है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना भी प्रभावित हो रही है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण रसोइये अब लकड़ी के चूल्हों पर बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। राजधानी पटना के कई हॉस्टलों में भी गैस की कमी देखी जा रही है। कुछ जगहों पर लोग इंडक्शन चूल्हों का सहारा लेकर खाना बना रहे हैं।


बताया जा रहा है कि कुछ हॉस्टलों और कैंटीन में गैस की कमी के कारण भोजन की व्यवस्था सीमित कर दी गई है। कई जगहों पर ‘दीदी की रसोई’ में सिर्फ चाय बनाकर काम चलाया जा रहा है। पटना में पीएमसीएच और एससी-एसटी छात्रावास में गैस सिलेंडर की आपूर्ति करीब 30 प्रतिशत तक कम कर दी गई है। वहीं निजी हॉस्टल संचालक भी वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।


एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार ने हाल ही में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग 20 प्रतिशत तक सीमित कर दी है। साथ ही इसके दाम में भी करीब 144 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दूसरी ओर, 14 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए उनकी सप्लाई पर भी नियंत्रण किया गया है। स्थिति यह है कि पटना समेत राज्य के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग पिछले एक सप्ताह से गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े नजर आ रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। लोग अफवाह पर ध्यान ना दें। जिल प्रशासन लगातार जमाखोरो के खिलाफ कार्रवाई भी कर रही है।