BPSC teacher verification : BPSC से बहाल शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की होगी गहन जांच, शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन

BPSC teacher verification : बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। बहाली के करीब दो साल बाद अब शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन जांच कराई जाएगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 09 Jan 2026 09:05:55 AM IST

BPSC teacher verification : BPSC से बहाल शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की होगी गहन जांच, शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन

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BPSC teacher verification : बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से बहाल हुए शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। बहाली के लगभग दो साल बाद अब इन शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की दोबारा और गहन जांच कराई जाएगी। इसको लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को पत्र जारी कर प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया है। इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।


शिक्षा विभाग की ओर से शुरू की गई यह जांच केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि शिक्षकों के पूरे शैक्षणिक करियर को खंगाला जाएगा। इसमें मैट्रिक, इंटरमीडिएट, स्नातक (बीए), स्नातकोत्तर (एमए) के साथ-साथ शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े प्रमाणपत्र जैसे डीएलएड और बीएड भी शामिल हैं। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह वैध हों और संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हों।


16 जनवरी तक जमा करने होंगे वॉटरमार्क वाले दस्तावेज

शिक्षकों को अपने सभी जरूरी प्रमाणपत्र 16 जनवरी तक बीईओ कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है। खास बात यह है कि केवल वही प्रमाणपत्र मान्य होंगे, जिन पर बीपीएससी का वॉटरमार्क लगा होगा। ये वही दस्तावेज हैं, जिन्हें शिक्षकों ने बीपीएससी शिक्षक नियुक्ति के लिए आवेदन के समय ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया था। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नए या अलग से तैयार किए गए दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सभी शिक्षकों को एक निर्धारित फॉर्मेट में अपने दस्तावेजों की प्रतियां भरकर जमा करनी होंगी। समय सीमा के भीतर दस्तावेज नहीं जमा करने वालों पर विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।


टीआरई-1 से टीआरई-3 तक के सभी शिक्षक जांच के दायरे में

यह आदेश केवल किसी एक चरण या बैच के शिक्षकों तक सीमित नहीं है। बीपीएससी शिक्षक नियुक्ति के तीनों चरण—टीआरई-1, टीआरई-2 और टीआरई-3—के तहत बहाल हुए सभी शिक्षक इस जांच के दायरे में आएंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में कार्यरत शत-प्रतिशत शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाएगी।


इस फैसले के बाद शिक्षकों में हलचल जरूर है, लेकिन विभाग का कहना है कि जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। यह प्रक्रिया केवल व्यवस्था को दुरुस्त करने और फर्जीवाड़े की किसी भी आशंका को खत्म करने के लिए शुरू की गई है।

दूसरे जिलों से आए शिक्षकों का भी होगा सत्यापन

जांच की प्रक्रिया में वे शिक्षक भी शामिल होंगे, जो किसी अन्य जिले में बहाल हुए थे और बाद में स्थानांतरण के जरिए किसी दूसरे जिले में पदस्थापित हुए हैं। ऐसे सभी शिक्षकों को भी अपने प्रमाणपत्र वर्तमान जिले में ही जमा कराने होंगे और उनकी जांच यहीं कराई जाएगी। यानी शिक्षक चाहे जिस जिले में तैनात हो, उसके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य रूप से होगी।


संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय से कराया जाएगा मिलान

डीईओ ने बताया कि दस्तावेज जमा होने के बाद अगला चरण और भी अहम होगा। सभी प्रमाणपत्रों को संबंधित बोर्ड, परिषद और विश्वविद्यालयों को भेजा जाएगा। वहां से प्रमाणिकता की पुष्टि होने के बाद ही शिक्षकों की फाइल को पूरी तरह क्लियर माना जाएगा। यदि किसी शिक्षक के दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं या बोर्ड/विश्वविद्यालय से अमान्य घोषित होते हैं, तो उस पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसमें नौकरी रद्द होने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की संभावना हो सकती है।


पारदर्शिता और भरोसे की दिशा में कदम

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह की सख्त जांच से न सिर्फ फर्जी शिक्षकों पर लगाम लगेगी, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी। इससे योग्य और मेहनती शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत होगा।


कुल मिलाकर, बीपीएससी से बहाल शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की यह गहन जांच शिक्षा विभाग की अब तक की सबसे बड़ी सत्यापन प्रक्रियाओं में से एक मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे शिक्षा व्यवस्था की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।