1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 02 Feb 2026 01:13:38 PM IST
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Maithili language : केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्षेत्रीय भाषाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम और सकारात्मक कदम उठाया है। अब मैथिली भाषा को तिरहुत या वैदेही लिपि में गूगल कीबोर्ड और एंड्रॉइड-आईओएस जैसे प्रमुख मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस घोषणा के बाद मैथिली भाषियों में उत्साह की लहर है, क्योंकि यह पहल तकनीकी सुविधा के साथ-साथ भाषा की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देगी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस महत्वपूर्ण पहल की जानकारी साझा करते हुए बताया कि तिरहुत/वैदेही लिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए जरूरी तकनीकी प्रक्रियाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम डिजिटल इंडिया के उस विजन से जुड़ा है, जिसमें हर भाषा और हर समुदाय को तकनीक से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मैथिली भाषियों के लिए यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि अब तक उन्हें डिजिटल दुनिया में अपनी भाषा में संवाद करने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अधिकांश लोग मैथिली को देवनागरी या रोमन लिपि में लिखते थे, जिससे भाषा की मूल पहचान कमजोर पड़ती रही। तिरहुत लिपि के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने से न केवल भाषा की शुद्धता बनी रहेगी, बल्कि नई पीढ़ी भी अपनी पारंपरिक लिपि से जुड़ सकेगी।
भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान की रीढ़ भी होती है। तिरहुत लिपि के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने से मैथिली साहित्य, लोककथाएं, गीत, शोध और शैक्षणिक सामग्री को ऑनलाइन साझा करना आसान हो जाएगा। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म पर भी मैथिली की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे यह भाषा डिजिटल युग में और अधिक सशक्त होगी।
यह फैसला वर्षों से मैथिली को उसकी मूल लिपि के साथ डिजिटल मान्यता दिलाने की मांग करने वाले भाषाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की लंबी मेहनत का परिणाम है। अब जब सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल की है, तो उम्मीद है कि आने वाले समय में मैथिली भाषा तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर भी और अधिक मान्यता प्राप्त करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि तिरहुत/वैदेही लिपि की डिजिटल उपलब्धता सिर्फ एक तकनीकी सुविधा नहीं है, बल्कि यह मैथिली भाषा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल भाषा प्रेमियों को लाभ मिलेगा, बल्कि छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए भी सामग्री उपलब्ध कराना आसान होगा।
इस पहल से यह स्पष्ट संदेश भी जाता है कि भारत सरकार क्षेत्रीय भाषाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सशक्त बनाने और प्रत्येक भाषा को उसकी असली पहचान देने की दिशा में सक्रिय है। मैथिली भाषियों के लिए यह कदम उनकी भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और डिजिटल युग में उसकी भूमिका को मजबूत करने का सुनहरा अवसर साबित होगा।