1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 07, 2026, 11:14:22 AM
- फ़ोटो
Bihar School News : बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विद्यालयों में समय की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए लगातार दिशा-निर्देश जारी कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। घोसवरी प्रखंड के कड़रा गांव स्थित एक सरकारी विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह लचर नजर आ रही है। यहां शिक्षक तय समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते और नियमों को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा निर्धारित समय के मुताबिक विद्यालय का संचालन सुबह 6:00 बजे से 11:00 बजे तक होना चाहिए, लेकिन कड़रा गांव के इस विद्यालय में सुबह 6:30 बजे तक भी स्कूल परिसर वीरान पड़ा मिला। स्कूल खुलने का समय होने के बावजूद न तो शिक्षक मौजूद थे और न ही पढ़ाई की कोई व्यवस्था दिखाई दी। इससे साफ है कि समय की पाबंदी को लेकर यहां के शिक्षक गंभीर नहीं हैं।
देरी का ठीकरा प्रभारी पर फोड़ा
जब कुछ देर बाद पहुंचे शिक्षकों से देर से आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हुए सारा ठीकरा प्रभारी शिक्षक पर फोड़ दिया। शिक्षकों का कहना था कि “प्रभारी साहब ने ही 7:00 बजे तक आने को कहा है।” हालांकि जब मौके पर प्रभारी शिक्षक की तलाश की गई तो वे खुद भी स्कूल में मौजूद नहीं थे। इससे पूरे मामले में लापरवाही और अव्यवस्था साफ झलकती है।
गुटखा खाते पहुंचे शिक्षक
मीडिया की पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए। एक शिक्षिका टीना ने बताया कि आम तौर पर सभी शिक्षक 7:00 बजे तक स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन आज किसी कारणवश देर हो गई। वहीं करीब साढ़े सात बजे दो शिक्षक स्कूल पहुंचे, जो खुलेआम गुटखा खाते हुए दिखाई दिए। शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले विद्यालय परिसर में इस तरह का व्यवहार अनुशासनहीनता को दर्शाता है।
इसके बाद सुबह लगभग 8:00 बजे दो महिला शिक्षिकाएं स्कूल पहुंचीं। जब उनसे देरी के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और बिना कुछ बोले सीधे स्कूल परिसर के अंदर चली गईं। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि विद्यालय में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना काफी कमजोर है।
ग्रामीणों में नाराजगी
विद्यालय की इस स्थिति को देखकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को एक मिनट की देरी होने पर परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाता, तो फिर शिक्षकों को दो-दो घंटे देर से आने की छूट क्यों दी जा रही है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर शिक्षक ही समय पर स्कूल नहीं आएंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी निगरानी ठीक से नहीं हो रही है।
अधिकारियों ने दिया जांच का आश्वासन
इस मामले को लेकर जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) धर्मवीर कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से दर्ज होती है, इसलिए रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जांच में शिक्षकों की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालता है या फिर कड़रा गांव के इस विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए वास्तव में कोई ठोस कदम उठाया जाता है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला सीधे बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।