1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 06 Feb 2026 09:01:46 AM IST
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Bihar river : किशनगंज जिले में अवैध खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। एक ओर बिहार सरकार और खनन मंत्री अवैध खनन पर सख्ती के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जिले के कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत मौजा बड़ी पुल के समीप बगलबाड़ी पंचायत में NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। यह खनन नदी की धार से जुड़ी लाल कार्ड की जमीन पर किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि धारीवाल कंपनी द्वारा भारी मशीनों जैसे जेसीबी और पोकलेन का इस्तेमाल कर खुलेआम मिट्टी की खुदाई की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक यह जमीन पूरी तरह लाल कार्ड की श्रेणी में आती है, जिस पर किसी भी तरह की खुदाई या खनन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद यहां बड़े स्तर पर मिट्टी निकाली जा रही है। लगातार हो रही खुदाई के कारण कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो आने वाले समय में जान-माल के नुकसान का कारण बन सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन कोई नया मामला नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से जारी है। लोगों का आरोप है कि कई बार इसकी शिकायत संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस अवैध खनन से आसपास के खेतों और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित होने से बाढ़ और कटाव की समस्या भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्षेत्र के जानकारों का दावा है कि अब तक कई एकड़ जमीन से अवैध रूप से मिट्टी की खुदाई की जा चुकी है और इससे करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार किया गया है। इतना बड़ा अवैध खनन प्रशासन की जानकारी के बिना संभव नहीं है, यह सवाल भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
इस पूरे मामले को लेकर जब जिला पदाधिकारी विशाल राज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसकी तत्काल जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम के इस बयान के बाद लोगों को कार्रवाई की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए ग्रामीणों में संदेह भी बना हुआ है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन का यह आश्वासन सिर्फ बयान तक सीमित रहता है या वास्तव में अवैध खनन के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाते हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच पर टिका हुआ है और जिले के लोगों की नजर इस पर बनी हुई है।