1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 05 Jan 2026 07:48:53 AM IST
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Bihar Vigilance : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में निगरानी विभाग की कार्रवाई ने कृषि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक और परत खोल दी है। आत्मा योजना के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) संतोष कुमार से 19 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए जिला कृषि अधिकारी (डीएओ) सुधीर कुमार की अब आय से अधिक अर्जित संपत्ति की विस्तृत जांच की जाएगी। गिरफ्तारी के बाद उनके पटना स्थित आवास से 11 लाख रुपये नकद, करीब 250 ग्राम सोने-चांदी के जेवरात और निवेश से जुड़े अहम कागजात बरामद किए गए हैं, जिसके बाद निगरानी विभाग ने उनके पूरे संपत्ति नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
निगरानी विभाग को आशंका है कि सुधीर कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न पदों पर रहते हुए अवैध तरीके से बड़ी संपत्ति अर्जित की है। बरामद निवेश कागजातों के आधार पर अब उनकी चल-अचल संपत्तियों की खोजबीन की जा रही है। निगरानी टीम उन सभी जिलों में भी संपत्ति की जांच करेगी, जहां-जहां सुधीर कुमार की तैनाती रही है। इसके लिए संबंधित निबंधन कार्यालयों, अंचल कार्यालयों और बैंकों से रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। साथ ही, सुधीर कुमार द्वारा की गई वार्षिक संपत्ति घोषणा से वास्तविक संपत्तियों का मिलान कर गड़बड़ियों की पहचान की जाएगी।
इधर, गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने आरोपी डीएओ को न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से रविवार को उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इससे पहले शनिवार को निगरानी अधिकारियों ने उनसे कई घंटे तक सघन पूछताछ की, जिसमें संपत्ति और लेन-देन से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। निगरानी विभाग का कहना है कि पूछताछ के दौरान मिली जानकारियों के आधार पर जांच का दायरा और भी बढ़ाया जाएगा।
पूरे मामले की पृष्ठभूमि में रिश्वत की मांग और दबाव की गंभीर कहानी सामने आई है। दरअसल, बीटीएम संतोष कुमार को कृषि इनपुट की राशि के गबन के आरोप में पहले बर्खास्त किया गया था। बाद में पुनर्नियोजन के लिए डीएओ सुधीर कुमार ने उनसे दो लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। संतोष कुमार अब तक 1.81 लाख रुपये दे चुका था, जबकि शेष 19 हजार रुपये को लेकर उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि रिश्वत की पूरी राशि मिलने तक संतोष के पक्ष में पुनर्नियोजन संबंधी रिपोर्ट जारी नहीं की जा रही थी।
रिश्वत के लिए बढ़ते दबाव से परेशान होकर संतोष कुमार ने आखिरकार निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के बाद निगरानी डीएसपी मिथिलेश कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और जाल बिछाया गया। शनिवार को टीम ने मुजफ्फरपुर के रमना चर्च रोड मोहल्ला स्थित गली नंबर छह में डीएओ के किराए के आवास पर छापेमारी कर उन्हें 19 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने डीएओ के कार्यालय के साथ-साथ मुजफ्फरपुर और पटना स्थित उनके आवासों की भी गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, जेवरात और निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने से विभाग को संदेह है कि मामला केवल रिश्वत तक सीमित नहीं है, बल्कि आय से अधिक संपत्ति का भी गंभीर प्रकरण बन सकता है।
निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो सुधीर कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अलग से मामला दर्ज किया जाएगा। इस कार्रवाई से कृषि विभाग सहित अन्य सरकारी महकमों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
फिलहाल, निगरानी विभाग की टीम जांच को आगे बढ़ाते हुए दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक लेन-देन की पड़ताल में जुटी है। यह मामला न सिर्फ रिश्वतखोरी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की सख्त भूमिका कितनी जरूरी है।