1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 30, 2026, 10:54:41 AM
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Bihar Politics : बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने विस्तार से जानकारी दी और अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की।
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि सुबह वह मुख्यमंत्री आवास पर शिष्टाचार मुलाकात के लिए गए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं ही उन्हें अपने इस्तीफे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है। मुलाकात के बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की गई और जदयू के नेता भी आवश्यक दस्तावेज लेकर पहुंचे। इसके बाद पूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि अब बहुत जल्द इस सीट को औपचारिक रूप से खाली घोषित कर दिया जाएगा, जिससे आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो सके। यह एक सामान्य राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता है। ऐसे में नीतीश कुमार को यह निर्णय लेना ही पड़ा।
अवधेश नारायण सिंह ने नीतीश कुमार के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका और नीतीश जी का संबंध काफी पुराना और आत्मीय रहा है। उनके साथ लंबे समय तक काम करने का अनुभव बेहद सकारात्मक रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि नीतीश कुमार जैसे अनुभवी और विकासशील सोच रखने वाले नेता का बिहार की सक्रिय राजनीति से इस तरह जाना निश्चित रूप से एक कमी का अहसास कराएगा। यह टीस कभी नहीं जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में बिहार के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। चाहे वह बुनियादी ढांचे का विकास हो, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार हो या कानून-व्यवस्था की स्थिति—हर क्षेत्र में उन्होंने एक नई दिशा देने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व में बिहार ने कई नई ऊंचाइयों को छुआ और राज्य की छवि में भी सकारात्मक बदलाव आया।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के चेहरे से यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि वह इस इस्तीफे को लेकर भावनात्मक रूप से कितने प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार एक ऐसे नेता हैं जिनके भावों को पढ़ पाना आसान नहीं होता। मुलाकात के दौरान बातचीत में कहीं से भी यह नहीं लगा कि वह इस फैसले से दुखी हैं या किसी तरह की परेशानी में हैं। लेकिन असल भावना क्या है, यह तो वही बेहतर बता सकते हैं।
अंत में अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि यह बिहार के लिए एक भावुक क्षण जरूर है। एक ऐसे मुख्यमंत्री, जिन्होंने हमेशा विकास को प्राथमिकता दी, उनका केंद्र की राजनीति की ओर जाना राज्य के लिए एक खालीपन जरूर छोड़ जाएगा। फिर भी, उन्होंने उम्मीद जताई कि नीतीश कुमार जहां भी रहेंगे, अपनी कार्यशैली और अनुभव से देश की सेवा करते रहेंगे। इस तरह, यह इस्तीफा सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।