Dehri exam news : इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद: देर से पहुंचे छात्रों को प्रवेश नहीं, प्रेग्नेंट छात्रा सहित कई बाहर

रोहतास के डेहरी में इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान देर से पहुंचे 11 छात्रों को प्रवेश नहीं मिला। गर्भवती छात्रा सहित कई छात्र केंद्र के बाहर ही खड़े रहे।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 02 Feb 2026 12:39:06 PM IST

Dehri exam news : इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद: देर से पहुंचे छात्रों को प्रवेश नहीं, प्रेग्नेंट छात्रा सहित कई बाहर

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Dehri exam news : रोहतास जिले के डेहरी क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। आज सुबह इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों में देर से पहुंचे परीक्षार्थियों को किसी भी हाल में प्रवेश नहीं दिया गया। डेहरी के रामारानी जैन बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए परीक्षा केंद्र में 11 परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र के बाहर ही रह गए। इनमें एक सोनम नाम की गर्भवती छात्रा भी शामिल है।


परीक्षार्थियों का कहना है कि वे केवल एक-दो मिनट की देर से परीक्षा केंद्र पहुंचे थे, लेकिन केंद्र पर तैनात अधिकारियों ने उन्हें प्रवेश नहीं दिया। सोनम ने आरोप लगाया कि उन्हें परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश करने के दौरान धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया। वहीं, एक अन्य छात्रा ने बताया कि वह ट्रैफिक जाम के कारण देर से पहुंची थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्रवेश नहीं मिला।


सूत्रों के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर कुछ छात्राओं ने परीक्षा केंद्र के पिछले दरवाजे से अंदर प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें भी बाहर निकाल दिया गया। इस दौरान परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े परीक्षार्थी मायूस दिखाई दे रहे थे। कई छात्राओं और छात्रों ने यह कहा कि उन्हें केवल कुछ मिनट की देर से आने के कारण परीक्षा से वंचित कर दिया गया, जो उनके लिए काफी निराशाजनक और तनावपूर्ण स्थिति है।


परीक्षा समिति द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, प्रथम पाली की परीक्षा में परीक्षार्थियों को सुबह 9 बजे से पहले परीक्षा केंद्र में प्रवेश करना अनिवार्य है। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हालांकि, कई छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यह नियम बहुत कड़ाई से लागू किया गया और केवल कुछ मिनट की देरी को लेकर छात्रों को बाहर निकालना अनुचित है।


परीक्षार्थियों का कहना है कि वे परीक्षा की तैयारी के लिए लंबे समय से मेहनत कर रहे थे और केवल एक-दो मिनट की विलंबता के कारण परीक्षा से वंचित होना उनके लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से कठिन स्थिति है। कई छात्रों ने यह भी कहा कि गर्भवती छात्रा सहित कई कमजोर और संवेदनशील छात्राओं के साथ ऐसा व्यवहार करना उचित नहीं है।