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JOB NEWS: शिक्षा क्षेत्र में नई दिशा, कुलपति और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में बदलाव

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए कुलपति और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, आधुनिक और विशेषज्ञता-आधारित बनाना है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jan 16, 2025, 6:19:35 AM

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JOB NEWS: हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उच्च शिक्षा संस्थानों में कुलपति (वीसी) और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति और प्रमोशन के लिए नए नियमों की जानकारी दी है। इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में नए दृष्टिकोण और विशेषज्ञता को प्रोत्साहन देना है।


कुलपति नियुक्ति में बड़ा बदलाव

2025 के यूजीसी रेगुलेशंस के तहत कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब इस पद पर नियुक्ति के लिए 10 वर्षों का शिक्षण अनुभव अनिवार्य नहीं रहेगा। इसके बजाय, संबंधित क्षेत्र के अनुभवी और श्रेष्ठ ट्रैक रिकॉर्ड वाले विशेषज्ञ, जिनके पास सीनियर लेवल पर 10 साल का अनुभव है, भी इस पद के लिए योग्य होंगे।


पहले, 2010 के नियमों के अनुसार, तीन से पांच लोगों का पैनल इस पद के नाम पर अंतिम निर्णय लेता था। अब नई गाइडलाइंस के अनुसार, देशभर के समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर या सर्च कमेटी की प्रक्रिया के माध्यम से वीसी की नियुक्ति की जाएगी।


असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में नई नीति

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत सहायक प्रोफेसर के पद पर भर्ती के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। अब एमई (मास्टर्स ऑफ इंजीनियरिंग) और एमटेक (मास्टर्स ऑफ टेक्नोलॉजी) में 55% अंकों के साथ पीजी डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी बिना नेट क्वालिफाई किए भी आवेदन कर सकते हैं।


इसके अतिरिक्त, विषयों में भी छूट दी गई है। अभ्यर्थी यदि किसी भी विषय से यूजी या पीजी कर चुके हैं और संबंधित पीएचडी या नेट क्वालिफाई करते हैं, तो वे सहायक प्रोफेसर के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले यह छूट उपलब्ध नहीं थी।


नए नियमों पर विवाद और सरकार का पक्ष

कुलपति की नियुक्ति में गैर-शैक्षणिक व्यक्तियों को शामिल करने के प्रावधान पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बदलाव योग्यता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए किए गए हैं। इन नए प्रावधानों का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में विविधता और गुणवत्ता लाना है। असिस्टेंट प्रोफेसर और कुलपति की नियुक्ति में लचीलापन और विशेषज्ञता का प्रोत्साहन भारतीय शिक्षा प्रणाली में नई ऊर्जा का संचार करेगा।